यरूशलेम की सत्ता के गलियारों से इस वक्त सबसे बड़ी हलचल सामने आ रही है। वो नेता जिसने दशकों तक इजराइल की राजनीति पर एक छत्र राज किया। जिसने हर सियासी चक्रू को तोड़ दिया। आज उसी किंग बीबी यानी कि बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता से विदाई की जमीन तैयार हो रही है। सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि इस विदाई की जो कहानी है वो किसी और ने नहीं बल्कि इजराइल की संसद में बैठी अरब पार्टियों ने लिखी है। इजराइल के इतिहास में ऐसा उलटफेर शायद ही पहले कभी देखा गया हो। इजराइल में हालिया चुनाव नतीजों के बाद किसी भी गठबंधन को स्पष्ट जनादेश नहीं मिला था।

नेतन्याहू क बार फिर सरकार बनाने की जोड़तोड़ में लग गए थे। लेकिन इस बीच उनके कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंदी और इजरायली सेना के पूर्व चीफ गादी आइजनकोर्ट ने वो दांव चल दिया जिसने शायद पूरी बाजी पलट के रख दी है। इजराइली संसद यानी नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा 61 सीटों का है। याशार पार्टी के प्रमुख गांधी आइजनकोर्ट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के पास पहले से ही 48 सीटें मौजूद हैं। मंसूर अब्बास की अरब पार्टी राम ने पहले ही अपने आठ सांसदों के साथ आइज़न कोर्ट को समर्थन देने का ऐलान कर दिया और अब सबसे बड़ा धमाका करते हुए 11 सीटों वाली मुख्य अरा पार्टी जॉइंट लिस्ट ने भी गादी आइजन कोर्ट के नाम की सिफारिश राष्ट्रपति के सामने करने का फैसला कर लिया है। यानी कि अब आइजनकोर्ट के पास पहले से मौजूद 48 राम पार्टी के आठ अब जॉइंट लिस्ट पार्टी की 11 सीटें मिलाकर कुल 67 सीटें हो जाएंगी। यानी कि बहुमत के आंकड़े से भी आगे सीधे 67 सांसदों का भारी समर्थन गादी आइजनकोर्ट को आ रहा है।

इजराइल की राजनीति में अरब पार्टियां अमूमन सरकार बनाने की जो सीधी प्रक्रिया है उससे खुद को दूर रखती आई हैं। लेकिन इस बार यह दांव नेतन्याहू को सत्ता से बाहर निकालने के लिए चला गया है। जॉइंट लिस्ट के तीनों गुटों ने साफ शब्दों में कहा कि उनका यह फैसला जनता की उस मांग का नतीजा है जो नेतन्याहू और उनकी नीतियों को दोबारा सत्ता में लाने से रोकना चाहती है। उनका मानना है कि आइज़न कोर्ट को खुला समर्थन देकर किसी ऐसी यूनिटी गवर्नमेंट की गुंजाइश को खत्म किया जा सके जिसमें नेतन्याहू पिछले दरवाजे से सत्ता में आ सके। राम पार्टी के प्रमुख मंसूर अब्बास ने कड़ा रुख अपनाते हुए हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण का समर्थन किया है जो आइजनक कोर्ट के गठबंधन की मुख्य शर्तों में भी शामिल है। अब्बास ने साफ कहा कि अरब समाज इजराइल में एक पुल की तरह है और उन्हें किसी भी तरह से आतंकवाद का समर्थन या देशद्रोही नहीं समझा जाए। इस नई घटना के बाद अब जो गेंद है वो राष्ट्रपति एजाक खरजोक के पाले में है। परंपरा और संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति उसी नेता को सरकार बनाने का पहला न्योता देते हैं जिसके पास सबसे ज्यादा सांसदों का समर्थन हो और इस वक्त बेंजामिन नेतन याहू के मुकाबले गादी आइजन कोर्ट के पास स्पष्ट और निर्णायक बहुमत मौजूद है। युद्ध, अंतरराष्ट्रीय दबाव और अब घरेलू राजनीति। यह जो चक्रव्यूह है इसका बेंजामिन नेतन याू इससे भी बाहर निकल पाएंगे या फिर इजराइल में अब एक नए नेता के दौर की शुरुआत होगी। राष्ट्रपति भवन से जो भी न्योता आएगा वो इसे साफ कर देगा।

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