– दसवें दीपोत्सव में सरयू तट पर आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम, मुख्यमंत्री योगी ने किया प्रभु श्रीराम का पूजन
– उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन सहित राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और संत-महात्माओं की रही मौजूदगी
– राम मंदिर आंदोलन के संघर्ष को किया याद, बोले योगी- रामभक्तों और संतों का अपमान करने वालों को मांगनी होगी माफी
CITY NEWS FATEHPUR
अयोध्या(CNF)। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में आयोजित दसवें दीपोत्सव ने एक बार फिर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। सरयू नदी के पावन तट पर लाखों दीपों की रोशनी ने ऐसा अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किया कि पूरी रामनगरी त्रेतायुग की दिव्य स्मृतियों में डूबी नजर आई। इस भव्य आयोजन में 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीपों से घाटों को सजाया गया। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और उत्सव के इस संगम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल तथा उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन समेत अनेक गणमान्य अतिथि शामिल हुए।
रामकथा पार्क में आयोजित मुख्य समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान श्रीराम और माता जानकी की विधि-विधान से आरती एवं पूजा-अर्चना की। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने अयोध्या के ऐतिहासिक बदलाव का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनगरी ने लंबे संघर्ष, उपेक्षा और कठिन दौर का सामना करने के बाद आज अपनी सांस्कृतिक पहचान को नए गौरव के साथ स्थापित किया है।
मुख्यमंत्री ने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान संतों और कारसेवकों के योगदान को याद करते हुए कहा कि इस संघर्ष में अनेक लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उन्होंने पूर्व की राजनीतिक व्यवस्था पर निशाना साधते हुए कहा कि कभी अयोध्या में भगवान श्रीराम का नाम लेने पर भी विरोध का सामना करना पड़ता था। रामभक्तों पर गोलियां चलाई गईं और संतों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने रामभक्तों और संत समाज का अपमान किया है, उन्हें अयोध्या आने से पहले उनसे माफी मांगनी चाहिए और अपने पुराने कृत्यों पर पश्चाताप करना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में हुए विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय ऐसा था, जब यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की हवाई सुविधा की कल्पना तक मुश्किल मानी जाती थी, लेकिन आज महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थापित हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या के विकास को नई दिशा मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब पांच सौ वर्षों के संघर्ष और लंबे इंतजार के बाद भगवान श्रीराम अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं। आज अयोध्या अपनी प्राचीन गरिमा और गौरव को फिर से प्राप्त कर रही है। जिस नगरी को कभी उपेक्षा का सामना करना पड़ा, वह अब धार्मिक पर्यटन, विकास और सांस्कृतिक चेतना के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रही है।
इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी दीपोत्सव की भव्यता और अयोध्या की ऐतिहासिक महत्ता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सरयू तट पर लाखों दीपों की जगमगाहट केवल एक उत्सव का दृश्य नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है।
राज्यपाल ने कहा कि भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना के मूल आधार हैं। उनका जीवन आदर्श, मर्यादा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है। राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और भारतीय सभ्यता की पहचान हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत देश की एकता को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रही है।
दीपोत्सव के इस आयोजन ने एक बार फिर अयोध्या की धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक वैभव और विश्व पटल पर बढ़ती प्रतिष्ठा को प्रदर्शित किया। सरयू तट पर टिमटिमाते लाखों दीपों ने रामनगरी को भव्य आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया।
