बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हाल ही में, ढाका से करीब 50 किलोमीटर दूर नरसिंगदी शहर में एक 23 साल के हिंदू युवक को सोते समय जिंदा जला दिया गया। इस घटना ने मुस्लिम-बहुल देश में अल्पसंख्यक आबादी की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक की पहचान चंचल चंद्र भौमिक के रूप में हुई है, जो नरसिंगदी पुलिस लाइंस के पास एक गैरेज में काम करते थे।

घटना के बारे में

यह दुखद घटना शुक्रवार रात की है। काम के बाद थके हुए भौमिक गैरेज के अंदर ही सो गए थे। इसी दौरान कुछ अज्ञात हमलावरों ने गैरेज में आग लगा दी। गैरेज में पेट्रोल और इंजन ऑयल जैसे ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण आग तुरंत फैल गई, जिससे भौमिक की दम घुटने और जलने से मौत हो गई। सीसीटीवी फुटेज में हमलावरों को आग लगाते हुए देखा गया है, जिसे स्थानीय लोग एक सोची-समझी हत्या बता रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और अपराधियों की तलाश जारी है।

क्यों बढ़ रहे हिंदुओं पर हमले

2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश में लगभग 1.31 करोड़ हिंदू रहते हैं, जो कुल आबादी का करीब 7.95 प्रतिशत हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के दर्जनों मामले सामने आए हैं। भारत ने भी पड़ोसी देश में बढ़ते उग्रवाद और हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर कई बार अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है।

पहले की घटनाएं

पिछले कुछ समय में हिंसा की यह कोई अकेली घटना नहीं है। महज एक हफ्ते पहले गाजीपुर में एक हिंदू मिठाई दुकान मालिक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, जब वे अपने कर्मचारी को बचाने की कोशिश कर रहे थे। उसी सप्ताह सिलहट में एक हिंदू के घर को आग के हवाले कर दिया गया और फेनी जिले में एक हिंदू ऑटो-रिक्शा चालक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। ये लगातार होती घटनाएं वहां रह रहे अल्पसंख्यकों के बीच डर का माहौल पैदा कर रही हैं।

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