ईरान की राजधानी तेहरान और अल्बोर्ज प्रांत में इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमलों में भारी तबाही हुई है। ईरानी तेल मंत्रालय ने पुष्टि की है कि तेहरान के पश्चिमी हिस्से और करज शहर सहित तीन प्रमुख इलाकों में स्थित ईंधन डिपो, चार तेल स्टोरेज केंद्रों और एक पेट्रोलियम उत्पाद ट्रांसफर सेंटर को निशाना बनाया गया है। दमकल विभाग और सुरक्षा बल अभी भी प्रभावित क्षेत्रों में भीषण आग को बुझाने और स्थिति को नियंत्रित करने में जुटे हैं।
साजिश के तहत ‘काली बारिश’ का डर
तेहरान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फोआद इजादी ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने जानबूझकर इन तेल ठिकानों को तब निशाना बनाया जब बारिश का अनुमान था। प्रोफेसर के अनुसार, ‘हवा में धुएं और बारिश के मिलने से यह ‘काली स्याही’ जैसी जहरीली बारिश का रूप ले रही है।’ उनका आरोप है कि यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की एक सोची-समझी रणनीति है।
पीने के पानी पर मंडराया संकट
प्रोफेसर इजादी ने चेतावनी दी है कि तेहरान के आसपास के डैम और जल प्रणालियों में इस तेल के मिलने से पानी जहरीला हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘शहर के वॉटर सिस्टम से गुजरने वाले इस तेल का असर सीधे लोगों की सेहत पर पड़ेगा और लोग बीमार पड़ सकते हैं।’ तेल रिसाव और जहरीले धुएं के कारण ईरान को एक गंभीर ‘एनवायरनमेंटल डिजास्टर’ का सामना करना पड़ रहा है।
बढ़ता मानवीय और स्वास्थ्य जोखिम
इस घटना ने न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाई है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि अगर ट्रंप और नेतन्याहू के नेतृत्व में ये हमले जारी रहे, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। फिलहाल पूरे इलाके में प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है और जल स्रोतों को बचाने की कोशिशें की जा रही हैं।
