इसका सबसे बड़ा असर सुरक्षा पर पड़ेगा। पेशावर कोई साधारण शहर नहीं है। यह इलाका सालों से उग्रवाद, आतंकवाद और सीमा पार तनाव का बड़ा केंद्र रहा है। और यही वो जगह है जहां अमेरिका की मौजूदगी पाकिस्तान के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह इस समय तक अब तक काम कर रही थी। लेकिन अब जैसे ही अमेरिका ने यहां से अपने कदम पीछे हटा लिए हैं। अमेरिका पीछे हट रहा है। अफगानिस्तान की तरफ से खतरा बढ़ जाएगा। तहरीक तालिबान पाकिस्तान यानी कि टीटीपी जैसे आतंकी संगठन और भी ज्यादा एक्टिव होंगे और खेबर पखुनखवा पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द भी बन सकता है। और हाल ही के दिनों में कई ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं। याद रखिए खेबर पखुनवा पाकिस्तान का तीसरा सबसे बड़ा प्रांत है और इसकी सीमा सीधे अफगानिस्तान से लगती है। यहां रहने वाले पश्तून अफगानिस्तान के पश्तूनों से गहराई से जुड़े हुए हैं। यानी सीमा सिर्फ नक्शे में है। जमीन पर सीमा पार रिश्ते बहुत गहरे हैं। इसी वजह से जब अफगानिस्तान में तालीबान मजबूत होता है तो उसका सीधा-सीधा असर इस इलाके पर भी पड़ता है। पाकिस्तान के इस इलाके पर भी देखने को मिलता है।
यहां से अपने कदम हटा रहा है, पीछे हट रहा है तो यह खतरा पाकिस्तान के लिए अब और भी ज्यादा बढ़ने वाला है। एक तरफ अमेरिका पाकिस्तान से दूरी बना रहा है। लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका क्या कर रहा है? अमेरिका भारत की तरफ तेजी से अपने कदम बढ़ाता हुआ नजर आ रहा है। ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को पश्चिम बंगाल की जीत पर बधाई दी है। यह सिर्फ एक औपचारिक संदेश या एक फॉर्मल फोन कॉल नहीं था बल्कि यह एक स्पष्ट संकेत था, एक मैसेज था कि अमेरिका भारत के साथ अपने रिश्ते और भी ज्यादा मजबूत करना चाहता है और यह सिर्फ एक राजनीतिक मैसेज नहीं है। आर्थिक स्तर पर भी इसका असर साफ दिख रहा है। भारत की कंपनियां टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग और फार्मा सेक्टर में बता दें कि $.5 बिलियन से ज्यादा निवेश की तैयारी अमेरिका कर रहा है और यह निवेश अमेरिका में नौकरियां पैदा करेगा। सप्लाई चेन को यह कई गुना ज्यादा मजबूत करेगा। यानी एक बात बिल्कुल साफ है इन चीजों से इन घटनाओं से कि एक तरफ पाकिस्तान अस्थिरता और खतरे में घिरता जा रहा है। फंसता जा रहा है इस दलदल में और दूसरी तरफ भारत ग्लोबल पार्टनर बनता जा रहा है। याद कीजिए कुछ समय पहले बता दें कि अमेरिका ने पाकिस्तान को महत्व देने की कोशिश की थी।