महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबिटकर ने अमरावती शहर के एक सरकारी अस्पताल की नवजात देखभाल इकाई में तड़के लगी आग की जांच के लिए सात सदस्यीय समिति गठित करने की सोमवार शाम घोषणा की। इस घटना में तीन नवजातों की मौत हो गई थी। अबिटकर ने आग से प्रभावित जिला महिला अस्पताल में “गंभीर” अनियमितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि समिति आग लगने के कारणों का पता लगाएगी और आठ दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

उन्होंने कहा कि घटना के लिए जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पूर्वी महाराष्ट्र के इस शहर में आग से प्रभावित अस्पताल का दौरा कर स्थिति का जायजा लेने वाले मंत्री ने कहा कि समिति की अध्यक्षता राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त करेंगे। उन्होंने बताया कि समिति में महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) के अधिकारी, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के विशेषज्ञ और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

अबिटकर ने संवाददाताओं से कहा, “मैंने आज स्वास्थ्य विभाग के सचिव और कुछ स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ अस्पताल की स्थिति की समीक्षा की। यहां की स्थिति भयावह और दुर्भाग्यपूर्ण है। अस्पताल में जो भी अनियमितताएं थीं, वे गंभीर थीं।” उन्होंने कहा, “अस्पताल का निर्माण महज दो साल पहले हुआ था और उसके बाद आग लगने की ऐसी घटना हुई।

यह बिल्कुल गलत है।” मंत्री ने कहा कि आग सुबह करीब साढ़े तीन बजे नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में लगी और समिति इसके सही कारण का पता लगाने के साथ-साथ जिम्मेदारी भी तय करेगी। उन्होंने कहा, “समिति घटना की जांच करेगी और जिम्मेदारी तय करते हुए आठ दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट में जिन लोगों को इस हादसे के लिए दोषी या जिम्मेदार पाया जाएगा, उनके खिलाफ सिफारिश के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।” अधिकारियों ने बताया कि समिति अस्पताल के कामकाज और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों समेत घटना के विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी।

अबिटकर ने कहा कि उनका विभाग मंगलवार को राज्य के चिकित्सा बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य व्यवस्था के कामकाज की समीक्षा के लिए बैठक करेगा। अमरावती शहर के जिला महिला अस्पताल के एनआईसीयू में सोमवार तड़के भीषण आग लगने से तीन नवजातों की मौत हो गई थी। आग एनआईसीयू के उस हिस्से में लगी थी, जहां समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार बच्चों का इलाज किया जा कहा था।

धुएं से भरी इकाई से 36 अन्य नवजातों को बचा लिया गया था।

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