प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में भाजपा के नए नियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों से मुलाकात की। पार्टी ने अपनी संगठनात्मक रणनीति और आगामी चुनावों पर चर्चा करने के लिए बैठकों का एक सिलसिला शुरू किया है। इससे पहले दिन में, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पदाधिकारियों से मुलाकात की और उनसे युवा संवाद यानी युवाओं के साथ लगातार बातचीत को प्राथमिकता देने को कहा।

 

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी आने वाले दिनों में युवाओं तक पहुंचने के लिए बड़े कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही है। चर्चा इस बात पर केंद्रित थी कि 14 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों तक पहुंचने के लिए कोई अभियान कैसे तैयार किया जाए। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाने के कांग्रेस के फ़ैसले की शनिवार को एक प्रस्ताव पारित करके निंदा की और कहा कि वह राजनीतिक सहूलियत या तुष्टिकरण के लिए राष्ट्रगीत के सम्मान से कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगी। भाजपा ने यहां अपने नए पदाधिकारियों की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा कि कांग्रेस देश के संवैधानिक संस्थानों या कानूनों को दरकिनार नहीं कर सकती।

 

भाजपा ने घोषणा की कि वह ‘वंदे मातरम्’ की महत्ता को देश के हर कोने तक पहुंचाने के लिए एक अभियान शुरू करेगी। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने बैठक की अध्यक्षता की तथा बाद में ‘एक्स’ पर प्रस्ताव साझा किया। भाजपा का प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने बुधवार को अपने 1937 के प्रस्ताव को मानने का फैसला किया। इसके तहत अब पार्टी के सभी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के सिर्फ दो ही अंतरे गाये जायेंगे। नवीन ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज, 22 अगस्त 2026 को, ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत को संजोकर रखने के संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया।

 

उन्होंने कहा कि भाजपा कांग्रेस कार्य समिति के 19 अगस्त, 2026 के उस फैसले की ‘कड़ी निंदा और स्पष्ट तौर पर विरोध’ करती है, जिसमें 1937 के प्रस्ताव को दोहराते हुए कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के सिर्फ शुरुआती दो अंतरे को गाने तक सीमित कर दिया गया है। नवीन ने कहा कि भाजपा राष्ट्र गीत को ‘सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण या संकीर्ण वोट-बैंक की राजनीति’ का शिकार बनाने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक सहूलियत या तुष्टीकरण के लिए ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान और विरासत से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।’ नवीन ने कहा कि कांग्रेस कार्य समिति का कोई प्रस्ताव देश की संवैधानिक संस्थाओं या कानूनों से ऊपर नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि 1937 का कोई ‘राजनीतिक समझौता’ 1950 के संवैधानिक प्रावधानों और 2026 में संसद द्वारा बनाए गए कानून से ऊपर नहीं हो सकता।

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