देश की अर्धसैनिक बलों से जुड़ी एक अहम प्रशासनिक निर्देश सामने आया है, जिसमें अनुशासन और आचार संहिता को लेकर सख्ती बढ़ाई गई है।   केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिदेशक जी पी सिंह ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि सेवा में कार्यरत कोई भी कर्मी सरकार के आदेशों के खिलाफ विरोध से जुड़ी सामग्री साझा या प्रसारित न करे।

बता दें कि यह निर्देश मंगलवार सुबह विभिन्न स्तरों के अधिकारियों को भेजा गया, जिनमें कार्यालय प्रमुख, विभाग प्रमुख, कमांडिंग अधिकारी, उप महानिरीक्षक और महानिरीक्षक स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं। गौरतलब है कि इस निर्देश में स्पष्ट रूप से शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने की बात कही गई है।

 

मौजूद जानकारी के अनुसार, हाल के दिनों में नया केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अधिनियम 2026 को लेकर विभिन्न मंचों पर चर्चा और आलोचना बढ़ी है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों और कर्मियों के बीच असंतोष भी देखा गया है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है।

 

निर्देश में साफ कहा गया है कि कोई भी सेवा में कार्यरत अधिकारी यदि विरोध से जुड़ी सामग्री, खासकर डिजिटल या सामाजिक माध्यमों पर साझा करता है या उसका समर्थन करता है, तो उसके खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है। इसके साथ ही ऐसे सभी पोस्ट को तुरंत हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं। हालांकि प्राथमिक कार्रवाई वर्तमान में सेवा में मौजूद कर्मियों पर केंद्रित रखी गई है।

 

गौरतलब है कि सूत्रों के अनुसार हाल ही में कुछ स्थानों पर परिवार के सदस्यों द्वारा भी विरोध में भाग लेने की खबरें सामने आई थीं, जिससे शीर्ष नेतृत्व में चिंता बढ़ी है। ऐसे मामलों की पहचान करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

 

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जी पी सिंह ने कहा कि यह एक वर्दीधारी बल है और इसके अपने नियम और अनुशासन हैं, जिनका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार कार्रवाई हमेशा की जाएगी।

 

मौजूद जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों को यह जिम्मेदारी भी दी गई है कि वे अपने अधीनस्थों की गतिविधियों पर नजर रखें और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करें। यह निर्देश पहले जारी किए गए परामर्शों को और अधिक सख्ती के साथ लागू करने का संकेत देता है।

 

गौरतलब है कि सरकारी सेवा नियमों के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी को केंद्र या राज्य सरकार की नीतियों और फैसलों की सार्वजनिक आलोचना करने की अनुमति नहीं होती है। ऐसे में यह कदम बल के भीतर अनुशासन, एकता और आधिकारिक रुख को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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