भारत का बौद्धिक संपदा तंत्र तेजी से मजबूत हो रहा है और देश नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इसी श्रृंखला में नई दिल्ली में आयोजित एसोचैम वैश्विक आईपी सम्मेलन 2026 में विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब केवल विचारों का बाजार नहीं, बल्कि नवाचार और तकनीकी विकास का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। सम्मेलन का मुख्य विषय “भारत के आईपी भविष्य की पुनर्कल्पना : वैश्विक नेतृत्व की ओर अगली छलांग” रहा।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए पेटेंट, डिजाइन और व्यापार चिन्ह महानियंत्रक प्रोफेसर डॉक्टर उन्नत पी पंडित ने कहा कि भारत के बौद्धिक संपदा परिदृश्य में तेजी से बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि अब देश में दाखिल होने वाले कुल पेटेंट आवेदनों में 69 प्रतिशत हिस्सेदारी भारतीय संस्थाओं और उद्यमों की हो चुकी है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि भारत की नवाचार क्षमता मजबूत हो रही है और देश आत्मनिर्भर अनुसंधान की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष भारत में 1.43 लाख से अधिक पेटेंट आवेदन दर्ज किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत अधिक हैं। वहीं पिछले पांच वर्षों में पेटेंट आवेदनों में 146 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उनके अनुसार यह केवल सामान्य वृद्धि नहीं, बल्कि भारत के वैश्विक बौद्धिक संपदा नेतृत्व की दिशा में बढ़ते कदमों का संकेत है।

 

इस अवसर पर दिल्ली सरकार की सचिव पद्मा जायसवाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अर्थव्यवस्था के दौर में अमूर्त संपत्तियों की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक हो गई है। उन्होंने बताया कि देश की सकल घरेलू उत्पाद में डिजिटल व्यापार की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। ऐसे में तकनीकी विकास के साथ बौद्धिक संपदा की सुरक्षा को भी मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से नवाचार को बढ़ावा दे रही है, लेकिन इसके साथ कई नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियां जिस प्रकार के आंकड़ों पर प्रशिक्षित होती हैं, उसके कारण अनजाने में प्रतिलिपि अधिकार और व्यापार चिन्ह उल्लंघन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए डिजिटल व्यवस्था में जागरूकता और मजबूत सुरक्षा उपायों की तत्काल आवश्यकता है।

 

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के संयुक्त सचिव विनम्र मिश्रा ने कहा कि भारत का नवाचार तंत्र इस समय महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत अब शीर्ष 30 देशों में शामिल हो चुका है और बौद्धिक संपदा आवेदनों में लगातार दो अंकों की वृद्धि दर्ज की जा रही है।

 

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सबसे बड़ी प्राथमिकता इन बौद्धिक संपदा परिसंपत्तियों का व्यावसायीकरण सुनिश्चित करना है, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए। उन्होंने बताया कि देश के निर्यात में इन उद्यमों की हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत है और नवाचार आधारित आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।

 

सम्मेलन में दो विशेष विषयगत सत्र भी आयोजित किए गए। पहले सत्र “नवाचार से समृद्धि तक: बौद्धिक संपदा के माध्यम से अर्थव्यवस्था को मजबूती” में वैश्विक विशेषज्ञों ने चर्चा की कि किस प्रकार मजबूत बौद्धिक संपदा ढांचा आर्थिक विकास, व्यावसायीकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढावा दे सकता है।

 

दूसरे सत्र “नवाचार की नई सीमाएं: उभरती प्रौद्योगिकियों में बौद्धिक संपदा की चुनौतियां” में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और गहन तकनीक जैसे क्षेत्रों में सामने आ रही चुनौतियों और अवसरों पर विचार विमर्श किया गया। इसमें स्वामित्व संबंधी जटिलताओं, नियामक कमियों और भविष्य के अनुरूप बौद्धिक संपदा ढांचे पर विशेष चर्चा हुई।

 

सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि सरकार, उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ही मजबूत बौद्धिक संपदा तंत्र विकसित किया जा सकता है। यह तंत्र न केवल नवाचार को बढावा देगा, बल्कि नए विचारों को व्यावसायिक रूप से सफल और व्यापक स्तर पर उपयोगी समाधान में बदलने में भी मदद करेगा।

 

बहरहाल, एसोचैम वैश्विक आईपी सम्मेलन 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत तेजी से वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है और देश के विकास के अगले चरण में बौद्धिक संपदा तंत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है।

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