अमेरिका और क्यूबा के बीच बढ़ते तनाव के बीच वॉशिंगटन से एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बार-बार मिल रही धमकियों के बावजूद, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन फिलहाल क्यूबा के खिलाफ किसी तात्कालिक सैन्य कार्रवाई पर विचार नहीं कर रहा है। यह स्पष्टीकरण ट्रंप के उस विवादास्पद बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि “अगला नंबर क्यूबा का है”। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि ईरान के साथ तनाव के मद्देनजर पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी युद्धपोत लौटते समय क्यूबा का रुख कर सकते हैं।

क्यूबा के अधिकारियों के साथ प्रारंभिक बातचीत में शामिल अधिकारियों ने बताया कि उन्हें इस बात की ज्यादा उम्मीद नहीं है कि साम्यवादी सरकार मानवीय सहायता के रूप में करोड़ों डॉलर, सभी क्यूबाई नागरिकों के लिए दो वर्षों तक स्टार्लिंक की मुफ्त इंटरनेट सेवा, कृषि सहायता और बुनियादी ढांचे के समर्थन के प्रस्ताव को स्वीकार करेगी। लेकिन उनका कहना है कि क्यूबा ने अभी तक इस प्रस्ताव को पूरी तरह ठुकराया नहीं है, जबकि इसके साथ ऐसी शर्तें जुड़ी हैं जिनका सरकार लंबे समय से विरोध करती रही है, यहां तक कि ट्रंप प्रशासन द्वारा बृहस्पतिवार को हवाना पर नए प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी यह प्रस्ताव ठुकराया नहीं गया।

अधिकारियों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि सरकार के पास अब भी इस प्रस्ताव को स्वीकार करने का समय है। उन्होंने हालांकि इस बात को लेकर आगाह किया कि ट्रंप किसी भी वक्त अपना फैसला बदल सकते हैं और सैन्य विकल्प अब भी खुले हुए हैं।

अमेरिका के वित्त मंत्रालय और विदेश मंत्रालय ने इन प्रतिबंधों की घोषणा तब की, जब ट्रंप ने पिछले सप्ताह एक शासकीय आदेश पर हस्ताक्षर किए। इस शासकीय आदेश से प्रशासन की क्यूबा पर दंडात्मक कार्रवाई लागू करने की शक्ति का विस्तार हो गया। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्स ने इन कदमों को ‘सामूहिक दंड’ बताया और क्यूबा के खिलाफ अमेरिका सरकार की ‘‘नरसंहार करने की मंशा’’ की निंदा की। उन्होंन ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, ‘‘ये कदम इस धारणा पर आधारित हैं कि अमेरिका विदेशी नागरिकों और व्यवसायों को धमका कर दुनिया पर अपनी इच्छा थोप सकता है।

अनिश्चितता का माहौल

फिलहाल युद्ध के बादल टले हुए दिख रहे हैं, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में भारी अनिश्चितता बनी हुई है। ट्रंप प्रशासन की रणनीति स्पष्ट है—भारी दबाव और आकर्षक सहायता के जरिए क्यूबा में राजनीतिक बदलाव की कोशिश करना। अब गेंद क्यूबा की सरकार के पाले में है कि वह अपनी संप्रभुता और आर्थिक संकट के बीच क्या रास्ता चुनती है।

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