केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के लगभग दो हफ्ते बाद बीजेपी के बड़े नेता धर्मेंद्र प्रधान ने इस पूरे मुद्दे पर पहली बार खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक विवाद के समय हुए आंदोलन के दौरान युवाओं को भड़काने और गुमराह करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने यह भी साफ किया कि उनके लिए मंत्री की कुर्सी कभी भी देश के युवाओं से ज्यादा बड़ी नहीं रही।

 

जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों से बातचीत
जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों से बात करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जेन जी देश का फ्यूचर है और उनकी अपनी सोच और सपने हैं। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने नीट विवाद का फायदा उठाकर युवाओं को गलत रास्ते पर भेजने की कोशिश की। प्रधान ने कहा कि उन्होंने खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर इस्तीफे की बात कही थी और आखिरकार 25 जुलाई को उन्होंने अपना पद छोड़ दिया।

 

पद मेरे लिए कभी खास नहीं रहा
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह जेन जी को अपने बच्चों की तरह मानते हैं। उनके लिए शिक्षा मंत्री का पद कोई पर्सनल मुद्दा नहीं था, बल्कि देश के युवाओं की उम्मीदें ज्यादा जरूरी हैं। आपको बता दें कि नीट पेपर लीक के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों ने लंबा प्रोटेस्ट किया था। छात्रों की मांग थी कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बने और एग्जाम सिस्टम को सुधारा जाए। इसी दबाव के चलते उन्होंने 25 जुलाई को इस्तीफा दिया था।

 

नवीन पटनायक पर बोला हमला
ओडिशा के एक इवेंट में धर्मेंद्र प्रधान ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों में युवाओं का इस्तेमाल किया गया। रायराखोल में बीजेडी कार्यकर्ताओं के ‘धर्मेंद्र प्रधान वापस जाओ’ के नारों पर उन्होंने कहा कि वह ऐसे प्रोटेस्ट से डरने वाले नहीं हैं। वह एक किसान के बेटे हैं और अपने काम से कभी ओडिशा का नाम खराब नहीं होने देंगे।

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