लोकसभा में पेपर लीक रोकने वाले संशोधन बिल पर चर्चा चल रही है और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन में बहस की शुरुआत की। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा सोमवार को निचले सदन में पेपर लीक विरोधी कानून में संशोधन के लिए बिल पेश किए जाने के बाद उठाया गया है। इस बिल में 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने जैसी कड़ी सज़ा का प्रावधान है। वहीं, नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक मंगलवार को एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
लोकसभा में किसने क्या कहा
– कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने लोकसभा में परीक्षा प्रश्नपत्र निरोधक कानून को मोदी सरकार की विफलता का स्मारक करार दिया और कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को सदन में इसका जवाब देना चाहिए कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब 2024 में पेपर लीक का मामला सामने आया था तब तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इससे इनकार किया था और इस बार भी उनका रवैया वैसा ही रहा। कांग्रेस सांसद ने संसद परिसर में भाजपा के कुछ सदस्यों द्वारा प्रधान का स्वागत किए जाने का हवाला देते हुए कहा कि इस सरकार को शर्म आनी चाहिए कि संसद में पूर्व मंत्री का ऐसा स्वागत किया गया मानो वह पाकिस्तान से जंग लड़कर आए हों।
– भाजपा की सांसद बांसुरी स्वराज ने मंगलवार को लोकसभा में कांग्रेस तथा विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला और कहा कि वे यह विमर्श तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या 2014 के बाद पैदा हुई। उन्होंने कहा कि स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि पेपर लीक एक ‘घोर अपराध’ है। इसलिए, इस सदन को आश्वासन देना चाहुंगी कि मोदी जी के लिए पेपर लीक को घोर पाप कहना केवल एक बयान नहीं, उनकी सरकार की नीयत है। इसलिए यह संशोधन (विधेयक) लाया गया है।
– समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने को लेकर भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि उसने प्रधान का त्यागपत्र लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बचा लिया। यादव ने जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन का हवाला दिया और कहा कि ‘‘सरकार झुकती है, सिर्फ झुकाने वाला चाहिए।’’ तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर परीक्षाओं और छात्रों को संरक्षण देने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार द्वारा लाया गया लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक उसकी 12 साल की ‘‘अक्षमता को’’ समाप्त नहीं कर सकता। चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में प्रवेश के लिए होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को अनावश्यक बताते हुए द्रमुक सांसद दयानिधि मारन ने कहा कि इस परीक्षा रोक लगनी चाहिए क्योंकि इसमें एकरूपता नहीं है।
– प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि इस सरकार ने लगातार उन सभी सेक्टर को कमज़ोर किया है जिनसे रोज़गार पैदा होते हैं। परीक्षा प्रणाली ही फेल हो गई है। पिछले दशक में 152 बार पेपर लीक हुए हैं। करोड़ों छात्र इससे प्रभावित हुए हैं, फिर भी किसी एक भी दोषी या पेपर लीक माफिया के किसी एक भी सदस्य को सज़ा नहीं दी गई है। प्रियंका ने सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने हमारे शिक्षा तंत्र को RSS प्रचारकों से भरकर उसे खोखला कर दिया है।
