लेखक:- मोहसिन खान
सिटी न्यूज फतेहपुर
आज का युग जितना आधुनिक और तकनीकी रूप से विकसित हुआ है, इंसान के रिश्तों में उतनी ही तेजी से विश्वास की कमी भी बढ़ती जा रही है। चेहरे पर मुस्कान, जुबान पर मिठास और दिल में स्वार्थ रखना आज की सामाजिक व्यवस्था की एक कड़वी सच्चाई बनती जा रही है।
कहते हैं कि इंसान की सबसे बड़ी पूंजी उसका विश्वास होता है, लेकिन आज इसी विश्वास को तोड़ना कुछ लोगों के लिए बेहद आसान हो गया है। धोखेबाजी अब केवल पैसे के लेन-देन तक सीमित नहीं रही, बल्कि दोस्ती, रिश्तेदारी, प्रेम, राजनीति, व्यापार और सामाजिक जीवन तक अपनी जड़ें जमा चुकी है।
आज किसी से मिलते समय यह समझना मुश्किल हो गया है कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में आपका शुभचिंतक है या अपने किसी स्वार्थ की पूर्ति के लिए आपके करीब आया है। कुछ लोग जरूरत पड़ने पर इतने अपने बन जाते हैं कि उनके सामने अपने भी पराये लगने लगते हैं, लेकिन जैसे ही उनका उद्देश्य पूरा होता है, वही लोग पहचानने से भी कतराने लगते हैं।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आज ईमानदारी और सच्चाई की बातें करने वाले लोगों की कमी नहीं है, लेकिन उन बातों पर अमल करने वालों की संख्या लगातार घटती दिखाई देती है। दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले कुछ लोग स्वयं अवसर मिलते ही अपने सिद्धांतों को ताक पर रख देते हैं।
राजनीति और सामाजिक जीवन में भी स्वार्थ की यह प्रवृत्ति साफ दिखाई देती है। पद, प्रतिष्ठा और निजी लाभ के लिए दोस्ती बदल जाती है, वादे टूट जाते हैं और वर्षों के संबंध पलभर में भुला दिए जाते हैं। किसी की मजबूरी का फायदा उठाना, मीठी बातों में उलझाकर अपना काम निकालना और जरूरत खत्म होते ही दूरी बना लेना एक चिंताजनक सामाजिक प्रवृत्ति बनती जा रही है।
डिजिटल युग ने धोखेबाजी के नए रास्ते भी खोल दिए हैं। सोशल मीडिया पर नकली पहचान, झूठे वादे, ऑनलाइन ठगी और दिखावे की दुनिया में वास्तविकता को पहचानना चुनौती बन गया है। यहां तक कि कई बार लोग अपनी असलियत छिपाकर दूसरों के विश्वास और भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हैं।
लेकिन यह भी सच है कि हर व्यक्ति धोखेबाज नहीं होता। आज भी समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं जो रिश्तों को स्वार्थ से ऊपर रखते हैं, अपनी जुबान की कीमत समझते हैं और कठिन परिस्थितियों में भी साथ नहीं छोड़ते। जरूरत इस बात की है कि हम ऐसे लोगों की पहचान करें और अपने जीवन में ईमानदारी को महत्व दें।
हमें यह समझना होगा कि किसी को धोखा देकर कुछ समय के लिए सफलता या लाभ तो हासिल किया जा सकता है, लेकिन उससे सम्मान और विश्वास कभी नहीं खरीदा जा सकता। पैसा खो जाने पर दोबारा कमाया जा सकता है, लेकिन एक बार टूटा हुआ विश्वास दोबारा कायम करना बेहद मुश्किल होता है।
अंततः धोखेबाजी करने वाला व्यक्ति शायद कुछ समय के लिए दूसरों को पराजित कर दे, लेकिन वह अपने चरित्र और व्यक्तित्व को स्वयं ही कमजोर कर देता है। समाज की असली तरक्की ऊंची इमारतों, बड़ी गाड़ियों और आधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि ईमानदार इंसानों और मजबूत रिश्तों से होती है।
इसलिए आज जरूरत केवल धोखेबाजों से बचने की नहीं, बल्कि स्वयं भी ऐसा इंसान बनने की है जिस पर कोई आंख बंद करके भरोसा कर सके। क्योंकि दुनिया में सबसे महंगी चीज दौलत नहीं, बल्कि किसी के दिल में आपके लिए मौजूद विश्वास है।
