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फतेहपुर(CNF)। सरकारी सिस्टम की लापरवाही के चलते प्राइवेट स्कूलों की मनमानी खूब चल रही है। निजी स्कूलों में एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो गया है। स्कूल संचालक फीस के नाम पर पैरंट्स को को को लूट ल रहे है। प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए जिले में जिला शुल्क नियामक समिति (डीएफआरसी) बनाई है। कमेटी की बिना सहमति के फीस बढ़ा दी हैं। साल हो गए, लेकिन अभी तक एक भी बैठक नहीं हुई। इस कारण अभिभावक परेशान है। एक अप्रैल से नया सत्र शुरू होते ही सरकारी विभाग के नियम की अनदेखी करते हुए स्कूलों ने एडमिशन, ट्यूशन, ट्रांसपोर्ट और स्टेशनरी के नाम पर दस से 15 फीसदी फीस बढ़ा दी है। इसके साथ ही स्टेशनरी बेचने पर रोक के बाद भी स्कूल परिसर में दुकान सजाई जा रही है। निजी स्कूलों की मनमानी को देखते हुए सरकार उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियम) अधिनियम 2018 लेकर आई थी। इससे बहुत हद तक स्कूलों की ओर से मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने कमीशन के चक्कर में बार-बार यूनिफॉर्म बदलने और निर्धारित दुकान से किताबें खरीदने पर रोक लग पाई।

निजी स्कूलों के आगे सरकारी सिस्टम फेल

युवा विकास समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि निजी स्कूलों की मनमानी के आगे सरकारी सिस्टम फेल होता नजर आ रहा है। नया सत्र शुरू हो गया है, लेकिन प्राइवेट स्कूल प्रबंधन को सरकारी नियमों की कोई परवाह नहीं है। स्कूलों ने मनमाने तरीके से नए सत्र में फीस बढ़ा दी है। इसका खमियाजा अभिभावक उठा रहे है और जिम्मेदार अफसर मौन है। अभिभावक संजय दत्त ने बताया कि स्कूल में ट्यूशन फीस के नाम पर दस फीसदी फीस को बढ़ा दिया है, जबकि बच्चा अभी छोटी क्लास में है। इसके अलावा ड्रेस, स्टेशनरी और ट्रांसपोर्ट के दाम को अलग बढ़ाया है। आखिर निजी स्कूल सरकारी सिस्टम से इतने ऊपर हो गए है, वे उन्हें भी नजर अंदाज कर रहे है।

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