फोटो परिचय- (1) असोथर मंडी समिति में किसान हुंकार महारैली को संबोधित करते भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत।
– 2027 के चुनाव को लेकर बोले राकेश टिकैत, जाति-धर्म के मुद्दों पर भाजपा को घेरा
– धान खरीद में अनियमितताओं का आरोप, गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। किसानों की उपज का उचित मूल्य, धान खरीद में कथित अनियमितताओं और गन्ने के दाम में बढ़ोतरी जैसे मुद्दों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) ने सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। मंगलवार को असोथर मंडी समिति में आयोजित किसान हुंकार महारैली में संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कृषि नीतियों पर सवाल उठाते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी लागू करने की मांग की। उन्होंने आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा पर जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करने का आरोप भी लगाया।
मीडिया से बातचीत में टिकैत ने कहा कि चुनाव के दौरान जनता को जाति और धर्म के मुद्दों में उलझाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जाती है। उनके मुताबिक, किसानों की आर्थिक स्थिति, फसलों का उचित मूल्य और कृषि से जुड़ी समस्याएं चुनावी बहस के केंद्र में होनी चाहिए, लेकिन इन बुनियादी सवालों से ध्यान हटाया जाता है।
धान खरीद में गड़बड़ी का आरोप
राकेश टिकैत ने धान खरीद व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर उत्पादित मंसूरी धान को रामपुर, मुरादाबाद, शाहजहांपुर और बरेली जैसे जिलों में ले जाकर बेचे जाने का खेल चल रहा है, जबकि उनके अनुसार इन क्षेत्रों में मंसूरी धान का उत्पादन नहीं होता। उन्होंने इस व्यवस्था में बिचौलियों और व्यापारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए रामपुर में एक वर्ष के दौरान करीब 200 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एमएसपी से कम कीमत पर खरीद रोकने की मांग
किसान नेता ने कहा कि केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को इसका लाभ दिलाने के लिए कानूनी व्यवस्था भी जरूरी है। उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसी व्यवस्था लागू करे, जिससे किसानों की फसल निर्धारित एमएसपी से कम कीमत पर न खरीदी जा सके। टिकैत के मुताबिक, धान के अलावा मक्का, आलू सहित कई फसलों को भी किसान कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होते हैं। इससे उनकी लागत निकलना तक मुश्किल हो जाता है।
गन्ने का भाव 500 रुपये करने पर जोर
गन्ना किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए टिकैत ने गन्ने का मूल्य बढ़ाकर कम से कम 500 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग की। उन्होंने पूर्ववर्ती मायावती और अखिलेश यादव सरकारों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान गन्ने के दाम में बढ़ोतरी हुई थी। उन्होंने मौजूदा सरकार से भी किसानों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए गन्ने का उचित मूल्य तय करने की मांग की।
राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों की आय और कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने धान खरीद में पारदर्शिता, एमएसपी की कानूनी गारंटी और गन्ने के दाम में बढ़ोतरी को किसानों के हित से जुड़े प्रमुख मुद्दे बताते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।
