बंगाल में भाजपा की करारी हार के एक दिन बाद भी ममता बनर्जी का रुख अडिग रहा। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी और आरोप लगाया कि वे चुनाव हारी नहीं हैं, बल्कि भगवा पक्ष ने जबरदस्ती सत्ता हथिया ली है। 6 मई को मौजूदा बंगाल सरकार का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, ऐसे में क्या वह अपनी कुर्सी बचा पाएंगी? कानून के जानकार बताते हैं कि विरोध से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। राज्यपाल राज्य विधानसभा को भंग कर सकते हैं और सरकार का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा क्योंकि पांच साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। टीएमसी प्रमुख का इस्तीफा न देने का फैसला भारत के संविधान के खिलाफ है। ममता बनर्जी नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो राज्यपाल के पास सरकार को बर्खास्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। “यह संविधान के प्रावधानों के अनुरूप होगा।
ममता बनर्जी हालांकि, चुनाव परिणामों को किसी भी उपलब्ध मंच पर चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं। कोई भी उन पर इस तरह की पाबंदी नहीं लगा सकता। फिलहाल ऐसा कुछ भी नहीं है जो उन्हें कुर्सी पर बने रहने की अनुमति देता हो। अगर वह इस्तीफा नहीं भी देती हैं, तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता। राज्यपाल उन्हें अगले मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण तक पद पर बने रहने के लिए कह सकते थे। लेकिन संवैधानिक प्रावधान कहता है कि कोई भी सरकार पांच साल बाद जारी नहीं रह सकती। अगर बनर्जी चुनाव को चुनौती देती भी हैं, तो यह एक चुनावी याचिका के माध्यम से होगा जिसकी सुनवाई बाद में ही होगी। वह एसआईआर हटाए जाने के मुद्दे पर चुनाव को चुनौती दे सकती हैं, लेकिन यह एक अलग याचिका होगी। अगर वह यह कदम उठाती भी हैं, तो भी वह मुख्यमंत्री पद पर नहीं रह सकतीं।
संविधान के जानकार मानते हैं कि ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देंगी तो भी नई विधान सभा के गठन और नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राज्यपाल मौजूदा मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बगैर भी नई विधानसभा में नई सरकार का नया मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकते हैं। कार्यकाल के बीच मुख्यमंत्री बदलने को लेकर तो संवैधानिक अड़चन है लेकिन विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने पर नई विधानसभा के गठन में कोई अड़चन नहीं है। निर्वाचन आयोग ने जिनको जीत का प्रमाण पत्र दिया है वही मान्य होगा।
ममता का इस्तीफे से इनकार
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार किया और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का परिणाम जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश है। साथ ही उन्होंने सड़कों पर उतरकर लड़ाई लड़ने और विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने का संकल्प लिया। बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि उसकी लड़ाई निर्वाचन आयोग से थी, जिसने ‘‘भाजपा के लिए काम किया।’’ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के एक दिन बाद बनर्जी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हमारी हार जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि एक साजिश के तहत हुई है।… मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी।’’ तृणमूल कांग्रेस प्रमुख बनर्जी ने कहा कि मुझे इस्तीफा क्यों देना चाहिए? हम हारे नहीं हैं। मतों की लूट हुई है। इस्तीफे का सवाल ही कहां उठता है?
शुभेंदु अधिकारी ने बताया जनादेश का अपमान
शुभेंदु अधिकारी ने पलटवार किया है। शुभेंदु ने इस पूरे विवाद पर बहुत नपी-तुली और संवैधानिक टिप्पणी की है। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सब कुछ संविधान में लिखा है। मुझे इस बारे में ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है।
