बुधवार को लोकसभा ने पेपर लीक रोकने वाला बिल — ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026’ — पास कर दिया। यह बिल ऐसे समय में पास हुआ जब निचले सदन में राहुल गांधी की अमित शाह के खिलाफ टिप्पणियों और इस आरोप को लेकर बार-बार हंगामा हो रहा था कि गृह मंत्री ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश दिया था। NEET-UG पेपर लीक को लेकर हुए ज़बरदस्त विरोध-प्रदर्शनों के बाद पेश किए गए इस बिल को विपक्ष की तरफ़ से ज़ोरदार नारेबाज़ी के बीच ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

केंद्र सरकार ने सोमवार को यह संशोधन बिल पेश किया था। यह कदम NEET विवाद को लेकर देशभर में हुए छात्र विरोध-प्रदर्शनों के कुछ ही दिनों बाद उठाया गया, जिसके कारण धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस प्रस्तावित कानून का मकसद ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट’ में संशोधन करना है। इसके तहत परीक्षा का पेपर लीक करने में शामिल लोगों के लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान किया गया है, जिसमें 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना शामिल है।

 

हाल ही में मंज़ूर हुए बिल में पेपर लीक मामलों की जांच पूरी करने के लिए दो महीने की समय-सीमा तय की गई है। इसमें गलत तरीकों में शामिल लोगों के लिए सज़ा को 2024 के एक्ट के तहत पांच साल से बढ़ाकर 10 साल कर दिया गया है, साथ ही 50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। बिल में तीन महीने के अंदर मामलों को निपटाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का भी प्रस्ताव है। संगठित अपराधियों के लिए अधिकतम जुर्माना मौजूदा कानून के तहत तय सीमा से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है।

यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हाल ही में हुए NEET-UG पेपर लीक को लेकर देश भर में हुए व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बाद सरकार परीक्षा में धोखाधड़ी के खिलाफ कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए तेजी से कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि संगठित नकल गिरोहों की वजह से ईमानदार उम्मीदवारों की कड़ी मेहनत बेकार न जाए।

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