फोटो परिचय- डेंटल सर्जन दिनेश कुमार।
– डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में मिली सरकारी नियुक्ति
– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदान किया नियुक्ति पत्र, गांव में जश्न का माहौल
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। बिन्दकी तहसील क्षेत्र के केवई गांव के किसान परिवार में पले-बढ़े दिनेश कुमार ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और वर्षों के संघर्ष के दम पर ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने परिवार के साथ पूरे गांव को गौरवान्वित कर दिया। दिनेश कुमार का चयन लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में डेंटल सर्जन के पद पर हुआ है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें नियुक्ति पत्र प्रदान कर नई जिम्मेदारी सौंपी।
दिनेश की सफलता की कहानी किसी एक परीक्षा या एक दिन की उपलब्धि नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष और निरंतर मेहनत का परिणाम है। वर्ष 2009 में उन्होंने किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय से डेंटल का कोर्स पूरा किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लखनऊ और इलाहाबाद में निजी प्रैक्टिस शुरू की और लगातार अपने चिकित्सकीय अनुभव को बढ़ाते रहे। लंबे समय तक किए गए प्रयासों के बाद आखिरकार उन्हें सरकारी सेवा में डेंटल सर्जन के रूप में काम करने का अवसर मिला।
माता-पिता के त्याग को दिया सफलता का श्रेय
दिनेश कुमार ने अपनी उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने माता-पिता भोला प्रसाद सोनकर और श्याम कली देवी को दिया। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते रहे। सीमित संसाधनों के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई को प्राथमिकता दी और उसकी शिक्षा में किसी तरह की कमी नहीं आने दी।
दिनेश के मुताबिक, उनके माता-पिता ने आर्थिक कठिनाइयों के बीच भी हर संभव त्याग किया, ताकि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और जीवन में आगे बढ़ सकें। यही त्याग, मेहनत और आशीर्वाद उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बना।
गांव से सरकारी सेवा तक का सफर
किसान परिवार से निकलकर प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान में डेंटल सर्जन के पद तक पहुंचना दिनेश के लिए ही नहीं, बल्कि गांव के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का विषय बन गया है। नियुक्ति की खबर मिलते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। रिश्तेदारों, ग्रामीणों और परिचितों ने दिनेश कुमार को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
दिनेश कुमार की उपलब्धि ने एक बार फिर यह साबित किया है कि मजबूत इरादे, निरंतर मेहनत और परिवार का सहयोग हो तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।
