– महामंडलेश्वर साध्वी निरंजन ज्योति को देख-रेख सौंपने की मांग
– अधिवक्ता ने फिर सीएम को भेजा तीन पन्नों का शिकायती पत्र
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। जनपद के पौराणिक एवं ऐतिहासिक सिद्धपीठ तांबेश्वर महादेव मंदिर में करोड़ों रुपये के दान व चंदा राशि में हुई भारी हेराफेरी का मामला एक बार फिर गरमा गया है। अधिवक्ता अभिषेक सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तीन पन्नों का विस्तृत एवं तथ्यात्मक शिकायती पत्र प्रेषित कर इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने पूर्व में भेजी गई शिकायतों पर प्रशासनिक शिथिलता का हवाला देते हुए इस पत्र की प्रतियां प्रमुख सचिव गृह, प्रयागराज मंडल के आयुक्त तथा फ़तेहपुर के जिलाधिकारी को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी हैं।
शिकायती पत्र में किए गए खुलासे के अनुसार, लगभग डेढ़ दशक पूर्व मंदिर ट्रस्ट के तत्कालीन सचिव स्वर्गीय ओम प्रकाश रस्तोगी ने अपने पद एवं अधिकारों का दुरुपयोग किया था। उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक स्थित तांबेश्वर महादेव मंदिर के आधिकारिक खाते से दो किस्तों में कुल 25 लाख की धनराशि अपने निजी बैंक खाते में स्थानांतरित करा ली और फिर उस राशि से अपने व्यक्तिगत नाम पर एफडीआर बनवा ली। समय के साथ ब्याज जुड़ने के कारण उक्त एफडीआर की कुल परिपक्वता राशि वर्तमान में लगभग 1.25 करोड़ (सवा करोड़ रुपये) तक पहुँच चुकी है। दिवंगत सचिव के निधन के पश्चात उनके पुत्र मंदिर ट्रस्ट की गतिविधियों में सक्रिय हैं। आरोप है कि नीयत खराब होने के कारण वे इस विशाल राशि को मंदिर के अधिकृत बैंक खाते में वापस करने से लगातार इंकार कर रहे हैं। शिकायती पत्र में उल्लेख है कि ट्रस्ट के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री राधेश्याम गुप्ता, प्रबंधक सुधांशु श्रीवास्तव तथा कार्यवाहक अध्यक्ष मुखलाल पाल द्वारा धनराशि वापस लाने के लिए किए गए प्रशासनिक व व्यक्तिगत प्रयास पूरी तरह नाकाफी और औपचारिकता मात्र साबित हुए हैं, जबकि स्थानीय प्रशासन भी इस संगीन वित्तीय गड़बड़ी पर मूकदर्शक बना हुआ है। अधिवक्ता अभिषेक सिंह ने अपने पत्र में अयोध्या के भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर में पूर्व में उजागर हुए दान-चंदा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के प्रकरणों का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने सचेत किया कि तांबेश्वर महादेव मंदिर की स्थिति भी ठीक उसी राह पर बढ़ रही है। यदि शासन-प्रशासन और ट्रस्ट ने समय रहते इस गंभीर वित्तीय अनियमितता, दान के पैसों की बंदरबांट और मंदिर की दर्जनों अचल संपत्तियों को अवैध रूप से खुर्द-बुर्द करने की कोशिशों पर कड़ा संज्ञान नहीं लिया, तो विवाद बढ़ने पर सरकार की पारदर्शी छवि और साख पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से पुरजोर मांग की है कि मंदिर का सवा करोड़ रुपये का एफडीआर फंड तत्काल प्रभाव से मंदिर के आधिकारिक बैंक खाते में स्थानांतरित कराया जाए। दान व चंदे के संग्रह को पारदर्शी बनाने के लिए बैंक खातों को दुरुस्त कर नियमित सीए ऑडिट की व्यवस्था लागू की जाए। मंदिर की सुरक्षा, प्रबंधन और अचल संपत्तियों के संरक्षण की बागडोर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की अध्यक्ष एवं महामंडलेश्वर साध्वी निरंजन ज्योति को सौंपी जाए, जिससे इस पवित्र धाम की गरिमा और धार्मिक शुचिता बनी रहे।

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