इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी भाई की कसम खाकर ऐसा ऐलान किया है जिसे जानकर एक एक भारतीयों का खून उबलने लगेगा। ये बयान भले ही नेतन्याहू ने यहूदियों के लिए दिया है। लेकिन अगर इस बयान पर भारतीयों खासकर हिंदुओं ने अमल कर लिया तो पूरी दुनिया में कोई देश भारत की तरफ आंख नहीं उठा पाएगा। हिंदुओं को बदनाम नहीं कर पाएगा। दरअसल ईरान अमेरिका की बातचीत से नाराज नेतन्याहू अचानक अपने शहीद भाई की स्मारक पर पहुंच गए और कसम खा ली। नेतन्याहू ने सबसे पहले कहा कि 50 साल पहले मैंने अपने बड़े भाई और इजरायल के एक हीरो लेफ्टिनेंट कर्नल योनी नेत्नायहू को खो दिया था। आज मैं उनकी स्मारक पर कसम खाता हूं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं हासिल करने दूंगा। इसके बाद अमेरिका पर भड़कते हुए नेतन्याहू ने कहा कि आपसे, अमेरिका के यहूदियों से और दुनिया भर में फैले यहूदियों से बस एक ही बात की गुजारिश करता हूँ। खड़े हो जाओ। पीछे मत हटो। डरो मत। पलटकर जवाब दो। क्योंकि लोग हमारा सम्मान तभी करेंगे जब हम खुद अपना सम्मान करेंगे।
नेतन्याहू ने कहा कि सच के लिए खड़े हो जाओ। इजरायल के लिए खड़े हो जाओ। यहूदी समुदाय के लिए खड़े हो जाओ। यहूदियों के भविष्य के लिए खड़े हो जाओ। वार्ताओं में चाहे जो कुछ भी हो—समझौता हो या न हो। मैं आपसे वादा करता हूँ कि जब तक मैं प्रधानमंत्री हूँ, ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा। कभी नहीं। अब आप कल्पना कीजिए कि संयुक्त राज्य अमेरिका (US) की सीमा के उस पार क्या स्थिति है। आपके सामने हजारों आतंकियों की एक ऐसी फौज खड़ी है जो आपके शहरों और कस्बों पर रॉकेटों, बैलिस्टिक मिसाइलों और घातक ड्रोनों से हमला करती है। वे आपके सैनिकों को मारते हैं। वे आपके नागरिकों को मारते हैं। वे आपके बच्चों को मारते हैं। और वे हर दिन उन्हें धमकाते हैं। तो भला ऐसे में अमेरिका क्या करता?
नेतन्याहू ने कहा कि जो अमेरिका करेगा वही मैं कर रहा हूं। चलिए, हम अपनी तरफ से गोलीबारी रोक देते हैं। क्या अमेरिका यही कहता? नहीं। आप बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि अमेरिका क्या करता। वह सीमा पार जाता, एक सुरक्षा क्षेत्र बनाता, आतंकियों का खात्मा करता और तब तक अपने लोगों की रक्षा करता जब तक कि वह खतरा हमेशा के लिए खत्म न हो जाता।
