नेपाल में महज चंद महीने पहले ही सैलाब ने भयानक तबाही मचाई थी। जिसमें करीब 2000 लोग मारे गए थे। जबकि 5000 से ज्यादा लोग लापता हो गए थे। अब एक बार फिर नेपाल में बाढ़ और सैलाब ने तबाही मचाई है। नेपाल के गोरखा जिले के चुमनुबरी गांव पालिका में अचानक भीषण बाढ़ आ गई। भूड़ीगढ़ की नदी में आई बाढ़ से पीयू और बगार गांव के 35 मकान बह गए। बाढ़ के चलते कई गांवों में भारी नुकसान हुआ है। जबकि कई मोटर पुल और झूला पुल भी बह गए हैं। प्रशासन ने नदी के निचले तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की। गोरखघर के प्रमुख जिला अधिकारी धरेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया रविवार सुबह 4:35 पर बड़ी बाढ़ आने की सूचना मिली। बूढ़ीगढ़ की नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद स्वास्थ्य आपातकालीन केंद्र को सक्रिय कर दिया गया। उधर नेपाल बाढ़ पूर्व अनुमान विभाग ने रविवार सुबह एक और जबरदस्त बाढ़ की चेतावनी जारी की। नेपाल का राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण में बूढ़ी गंडक नदी में जबरदस्त बाढ़ आने की आशंका जताई है। विभाग ने लोगों से नदी से दूर रहने और ऊंची जगहों पर जाने की अपील की। रिपोर्ट में कहा गया कि इलाके में बारिश नहीं हुई थी। इसलिए लोगों को इस आपदा के आने का कोई अंदाजा नहीं था। बाढ़ आने के समय लोग अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में लगे हुए थे।  बता दें कि 26 अगस्त को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से भौतिक संपत्तियों को करीब 1.66 अरब अमेरिकी डॉलर का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस कुल नुकसान का 43% हिस्सा बुनियादी ढांचे से जुड़ा है और अब एक बार फिर नेपाल में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है।

यह बाढ़ की चेतावनी, 7 अक्टूबर को पश्चिमी नेपाल में आए 4.1 तीव्रता के भूकंप के चार दिन बाद जारी की गई है। नेपाल के नेशनल अर्थक्वेक मॉनिटरिंग एंड रिसर्च सेंटर के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार रात 9:37 बजे आया था और इसका केंद्र बाजुरा ज़िले में था। भूकंप और बूढ़ी गंडकी में बाढ़ की चेतावनी अलग-अलग घटनाएँ हैं। इन दोनों के बीच सीधा संबंध होने की कोई पक्की जानकारी नहीं है। नेपाल के पहाड़ी इलाके और भारी बारिश, भूस्खलन और नदियों में अचानक पानी बढ़ने के खतरे को देखते हुए, नदियों के किनारे रहने वाले लोगों के लिए समय पर चेतावनी मिलना बहुत ज़रूरी है। ताज़ा सलाह में संभावित रूप से प्रभावित इलाकों के लोगों से कहा गया है कि वे सरकारी निर्देशों का पालन करें, नदी के किनारों पर जाने से बचें और तब तक ऊंचे स्थानों पर रहें जब तक अधिकारी यह न बता दें कि खतरा टल गया है।

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