फोटो परिचय- जलभराव से प्रभावित धान के खेतों का निरीक्षण करते पूर्व डीआईजी रामतीर्थ परमहंस।
– जजरहा नाले की बदहाल व्यवस्था से खेतों में ठहरा पानी, रबी की बुवाई पर भी मंडराया खतरा
– पूर्व डीआईजी रामतीर्थ परमहंस ने प्रभावित गांवों का लिया जायजा, अधिकारियों से मांगा स्थायी समाधान
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। बारिश और बाढ़ के बाद खेतों से पानी न निकलने के कारण जिले के कई गांवों में खेती-किसानी पर संकट गहरा गया है। कमलापुर, म्योली, बरौंहा, धनसिंहपुर, मर्दनपुर, कठवारा, हथेमा और बड़ागांव समेत आसपास के क्षेत्रों में हजारों बीघे धान की फसल पानी में डूबी हुई है। लंबे समय तक जलभराव बना रहने से किसानों को फसल खराब होने के साथ अगली फसल की तैयारी प्रभावित होने की चिंता सता रही है।
किसानों की परेशानी जानने के लिए सपा नेता एवं पूर्व डीआईजी रामतीर्थ परमहंस धनसिंहपुर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली और बड़ागांव से जजरहा व घघौरा क्षेत्र तक जलनिकासी के प्रमुख साधन जजरहा नाले का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि नाले की समुचित सफाई और पानी निकासी की व्यवस्था न होने से हर साल किसानों को जलभराव का सामना करना पड़ता है।
रामतीर्थ परमहंस ने कहा कि समस्या के स्थायी निराकरण के लिए पूरे क्षेत्र का तकनीकी सर्वे कराकर प्राकृतिक ढलान के अनुसार जलनिकासी की व्यापक योजना तैयार करना जरूरी है। अलग-अलग स्थानों पर छोटे कार्य कराने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। यदि खेतों से जल्द पानी नहीं निकला तो धान की फसल को नुकसान पहुंचने के साथ रबी की बुवाई भी प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने वर्ष 1970 की बाढ़ का उल्लेख करते हुए कहा कि वह बचपन से ही क्षेत्र में बाढ़ और जलभराव की समस्या देखते आ रहे हैं। पहले ग्रामीण श्रमदान से नाले की सफाई और खुदाई में सहयोग करते थे। हाल ही में बड़ागांव और धनसिंहपुर के ग्रामीणों ने भी पुलियों में फंसी जलकुंभी हटाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अब जेसीबी और पोकलेन जैसी मशीनों की मदद से योजनाबद्ध तरीके से नाले की सफाई व खुदाई कराई जा सकती है।
पूर्व डीआईजी ने जिलाधिकारी, बाढ़ नियंत्रण विभाग और सिंचाई विभाग से जजरहा नाले का तकनीकी सर्वे कराने, आवश्यकतानुसार सफाई एवं खुदाई कराने तथा पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही अयाह शाह विधायक और सांसद से किसानों की समस्या को जिला स्तरीय बैठकों में उठाने की अपील की, ताकि जलभराव से प्रभावित गांवों को राहत मिले और किसानों की फसल को बचाने के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
