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फतेहपुर(CNF)। बारह वर्ष पुराने लूट और जानलेवा हमले के चर्चित मामले में न्यायालय ने तीन अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 2 लाख 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय के इस फैसले को पुलिस की प्रभावी विवेचना और मजबूत पैरवी का परिणाम माना जा रहा है।
ललौली थाने में 18 जनवरी 2014 को तत्कालीन वादी निरीक्षक छविनारायण सिंह की तहरीर पर मुकदमा अपराध संख्या 18/14 धारा 394, 307 एवं 411 आईपीसी के तहत पंजीकृत किया गया था। मामले में रायबरेली जनपद के थाना सरेनी क्षेत्र के ग्राम गेगासो निवासी मनीष कश्यप, गोलू उर्फ हिमांशु गुप्ता और रंजीत साहू को नामजद किया गया था। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत इस मामले को चिन्हित कर लगातार मॉनिटरिंग की गई। स्थानीय पुलिस, मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन पक्ष ने समन्वय स्थापित कर न्यायालय में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए। वैज्ञानिक ढंग से की गई विवेचना, सटीक साक्ष्य संकलन और प्रभावी पैरवी के चलते अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध कराने में सफल रहा। गुरुवार को एएसजे/एफटीसी कोर्ट संख्या-02 ने सुनवाई पूरी करते हुए तीनों अभियुक्तों को धारा 394, 307 और 411 आईपीसी में दोषसिद्ध ठहराया। न्यायालय ने प्रत्येक दोषी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए 75-75 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया। इस प्रकार तीनों दोषियों पर कुल 2 लाख 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन कन्विक्शन का उद्देश्य गंभीर अपराधों में शामिल अपराधियों को शीघ्र और कठोर सजा दिलाना है। इस मामले में मिली सफलता से न केवल पीड़ित पक्ष को न्याय मिला है, बल्कि अपराधियों में कानून का भय भी बढ़ेगा।
इस महत्वपूर्ण सफलता में मॉनिटरिंग सेल प्रभारी निरीक्षक श्रवण कुमार सिंह, उपनिरीक्षक अश्विनी वर्मा, कांस्टेबल रोहित राजावत, जितेंद्र सिंह एवं विवेक कुमार की विशेष भूमिका रही। वहीं विवेचक भानुप्रताप सिंह, पैरोकार ऋषि कुमार, कोर्ट मुहर्रिर सुनैना सोनकर तथा एडीजीसी अजय कुमार सिंह ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाने में अहम योगदान दिया।

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