बारिश के बाद गंगा नदी में बढ़े जलस्तर का दृश्य।

– खतरे के निशान से महज 30 सेंटीमीटर नीचे बह रही नदी, ग्रामीणों ने बढ़ाई निगरानी
– फसल, मकान और मवेशियों को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ी, यमुना अभी सुरक्षित दायरे में

CITY NEWS FATEHPUR

फतेहपुर(CNF)। लगातार बारिश के बीच गंगा के बढ़ते जलस्तर ने कटरी क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। नदी अब खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच चुकी है। बुधवार सुबह आठ बजे दर्ज किए गए जलस्तर के अनुसार गंगा 100.56 मीटर पर बह रही थी, जबकि खतरे का निशान 100.86 मीटर है। ऐसे में नदी खतरे के निशान से सिर्फ 30 सेंटीमीटर नीचे रह गई है। जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी भी कटरी के गांवों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है।

गंगा का पानी बढ़ने के साथ ही नदी किनारे बसे गांवों में ग्रामीणों की निगाहें लगातार नदी की धार पर टिकी हैं। सबसे अधिक चिंता किसानों को खेतों में खड़ी फसल की है। कटरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में परिवार खेती और पशुपालन पर निर्भर हैं। बाढ़ का पानी खेतों में पहुंचा तो तैयार फसल को नुकसान होने के साथ ही पशुओं के लिए चारे का संकट भी खड़ा हो सकता है।

जलस्तर बढ़ने की स्थिति में गांवों तक आने-जाने वाले रास्ते भी प्रभावित होने की आशंका है। कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को घरों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों ने जरूरी सामान और मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए संभावित ठिकानों पर भी नजर रखना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी गंगा खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन महज 30 सेंटीमीटर का अंतर लोगों को सतर्क रहने के लिए पर्याप्त है।

यमुना अभी खतरे से काफी दूर

उधर तिरहार क्षेत्र में यमुना का जलस्तर फिलहाल राहत की स्थिति में है। बुधवार सुबह आठ बजे यमुना का जलस्तर 92.72 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 100 मीटर है। यानी यमुना अभी खतरे के निशान से 7.28 मीटर नीचे बह रही है। इसके बावजूद लगातार बारिश के कारण क्षेत्र के ग्रामीण नदी के जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।

हर बढ़ते सेंटीमीटर पर नजर

कटरी के ग्रामीणों के लिए बाढ़ की चिंता पानी के घरों तक पहुंचने से पहले ही शुरू हो जाती है। नदी का जलस्तर बढ़ते ही खेतों, रास्तों और पशुओं की सुरक्षा को लेकर तैयारियां शुरू हो जाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी की धार और बारिश का रुख कभी भी बदल सकता है। ऐसे में फिलहाल गंगा का हर बढ़ता सेंटीमीटर उनके लिए महत्वपूर्ण हो गया है। बारिश थमने और जलस्तर में गिरावट आने पर ही कटरी के लोगों को वास्तविक राहत मिल सकेगी।

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