फोटो परिचय- मेरठ का चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड, जिसमें नीले ड्रम में शव छिपाने के मामले ने देशभर में सुर्खियां बटोरीं।

नीले ड्रम में शव छिपाने के मामले ने देशभर में खींचा था ध्यान, 22 गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ा मुकदमा

CITY NEWS FATEHPUR

मेरठ(CNF)। नीले ड्रम में शव छिपाने के मामले से सुर्खियों में आए सौरभ राजपूत हत्याकांड में बुधवार, 14 अक्टूबर को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला की सजा पर फैसला सुनाया। इससे पहले 30 सितंबर को दोनों को हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। लगभग 13 महीने तक चली न्यायिक प्रक्रिया में 126 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए। मुकदमे के दौरान घटना से जुड़े साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया गया।

मर्चेंट नेवी के पूर्व अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या का यह मामला कथित तौर पर शव को ठिकाने लगाने के तरीके के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था। अभियोजन के अनुसार, हत्या के बाद शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले प्लास्टिक ड्रम में छिपाया गया था। घर से शव के अवशेष मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और मामले में मुस्कान रस्तोगी तथा साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया।

126 सुनवाइयों में पेश हुए साक्ष्य, गवाहों के बयान बने अहम कड़ी

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटनाक्रम और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष को भी आरोपों के संबंध में दलीलें पेश करने का अवसर मिला। करीब 13 महीने चली कानूनी प्रक्रिया में गवाहों के बयान दर्ज किए गए और उपलब्ध साक्ष्यों पर न्यायालय में विचार-विमर्श हुआ।

17 सितंबर 2026 को सजा के मुद्दे पर अंतिम बहस पूरी हुई। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए कड़ी सजा की मांग की। सुनवाई के दौरान दोनों आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के समक्ष पेश हुए। सजा पर निर्णय लेने से पहले अदालत ने आरोपियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया।

सरकारी वकील कृष्ण कुमार चौबे के अनुसार, मामले में गंभीर अपराधों के लिए उचित दंड के सिद्धांत पर भी अदालत का ध्यान रहा। अंततः 30 सितंबर को दोषसिद्धि के बाद 14 अक्टूबर को सजा के संबंध में आदेश सुनाया गया।

मार्च 2025 में खुला था हत्याकांड

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सौरभ राजपूत 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ लौटे थे। आरोप है कि 3 और 4 मार्च के आसपास उनकी हत्या कर दी गई। इसके बाद शव के टुकड़े कर उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया। घर से शव के अवशेष मिलने के बाद घटना का खुलासा हुआ और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

सौरभ के भाई की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल और अन्य संबंधित साक्ष्यों को जुटाया। इसके बाद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ी और दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।

गिरफ्तारी से फैसले तक ऐसे आगे बढ़ा मामला

– 24 फरवरी 2025: सौरभ राजपूत के लंदन से मेरठ लौटने की बात सामने आई।
– 3-4 मार्च 2025: अभियोजन के अनुसार, इसी अवधि में सौरभ की हत्या की गई और शव को ड्रम में छिपाया गया।
– मार्च 2025: शव के अवशेष मिलने के बाद मामला उजागर हुआ। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
– 19 मार्च 2025: दोनों आरोपियों को मेरठ जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
– 12 मई 2025: पुलिस ने मामले में आरोपपत्र दाखिल किया।
– जुलाई 2025: मुकदमे को जिला जज की अदालत में स्थानांतरित किया गया।
– नवंबर 2025: हिरासत के दौरान मुस्कान ने बेटी को जन्म दिया।
– 17 सितंबर 2026: सजा के सवाल पर अंतिम बहस पूरी हुई।
– 30 सितंबर 2026: अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराया।
– 14 अक्टूबर 2026: अदालत ने दोनों की सजा पर निर्णय सुनाया।

नीले ड्रम ने बनाया देशव्यापी चर्चा का विषय

सौरभ राजपूत हत्याकांड केवल हत्या के आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शव को कथित तौर पर छिपाने के तरीके ने भी लोगों का ध्यान खींचा। मामले की जांच, गिरफ्तारी और अदालत में चली लंबी सुनवाई के दौरान यह प्रकरण लगातार चर्चा में बना रहा।

126 सुनवाइयों और गवाहों के बयानों के बाद अदालत ने पहले दोषसिद्धि का निर्णय दिया और फिर सजा पर आदेश सुनाया। इस फैसले के साथ मामले की न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ।

 

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