भारत के डिफेंस सेक्रेटरी का यह बयान काफी चर्चा में है, जहां वह बता रहे हैं कि भारत यूरोप को हथियार गोला बारूद एक्सपोर्ट करने वाला तीसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्टर बन गया है। वही भारत जो अपनी सैन्य जरूरतों के लिए कभी दुनिया भर की ओर टकटकी लगाकर देखता था वो भारत आज यूरोप का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बन चुका है और इसका ऐलान भी खुद भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने किया है। केपीएमजी अग्रसर भारत मंच के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा सचिव ने यह बड़ा ऐलान किया और बताया कि यूरोपीय देशों में चल रहे रीआर्म यूरोप अभियान और भारत के मजबूत होते घरेलू डिफेंस इकोसिस्टम के दम पर भारत अचानक से यूरोप को सैन्य साजो सामान और हथियार सप्लाई करने वाला तीसरा सबसे बड़ा खिलाड़ी बन चुका है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने मौजूदा वैश्विक हालात और भारत की छलांग को समझाते हुए कहा कि दुर्भाग्यवश दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष और भू राजनीतिक अनिश्चितता के कारण हथियारों की होड़ बढ़ रही है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सक्रिय संघर्षों की संख्या आज अपने उच्चतम स्तर पर है। ऐसे में हथियारों का व्यापार बढ़ना स्वाभाविक है। भारत परंपरागत रूप से बड़ी मात्रा में पारंपरिक गोला बारूद और तोपों के 155 मि.मी. गोले निर्यात करता रहा है। अचानक भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है और इसकी मुख्य वजह है आर्टिलरी शेल्स यानी कि तोप के गोलों की जबरदस्त मान।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह बताते हैं कि भारत का कुल रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ यानी कि लगभग 3.6 बिलियन यूरो के ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। आज भारत दुनिया के 80 से अधिक देशों को अपने डिफेंस प्लेटफॉर्म्स और हथियार बेच रहा है। रक्षा सचिव इस बात पर जोर देकर बताते हैं कि यह बदलाव रातोंरात नहीं आया है। पिछले 10 सालों में भारत का रक्षा ढांचा 16 सरकारी कंपनियों से निकलकर एक विशाल प्राइवेट और स्टार्टअप हब में बदल चुका है। आज देश में 840 से अधिक लाइसेंस कंपनियां और 17,000 से अधिक एमएसएमईस और स्टार्टअप्स काम कर रही हैं। इसके साथ ही भारत अपने सालाना 20 से 25 बिलियन डॉलर के रक्षा बजट का 75% हिस्सा घरेलू उद्योग मेक इन इंडिया आईडीीडीएम यानी कि इंडियन डिज़ डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चरर्ड पर खर्च कर रहा है। जिससे भारत को तकनीकी संप्रभुता मिल रही है। रूस पर निर्भरता घटाने के बाद भारत फ्रांस, ग्रीस, साइपस जैसे यूरोपीय देशों के साथ जॉइंट वेंचर स्थापित कर रहा है।

यूरोप के रक्षा बाजार में गहरी पैड बनाने की योजना भी भारत की है। साफ है कि विश्व शांति की पैरवी करता हुआ भारत आज आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण के दम पर उन ताकतों को हथियार बेच रहा है जो कभी भारत को रक्षा सामग्री बेचने में शर्तें लगाया करते थे। मेक इन इंडिया से मेक फॉर द वर्ल्ड का यह सफर भारत के उभरते महाशक्ति की बड़ी गवाही है। हालांकि रक्षा सचिव ने यह भी कहा कि जैसे ही विश्व स्तर पर संघर्षों की संख्या कम होगी, रक्षा निर्यात वापस से अपने सामान्य ग्रोथ रेट पर वापस आ जाएगा। लेकिन यूरोप को हथियार बेचने में तीसरे नंबर का देश बनना भारत के लिए बड़ी कामयाबी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Call Now