समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 2027 का विधानसभा चुनाव अयोध्या से लड़ने की सलाह दी। विपक्ष के पूर्व नेता राम गोविंद चौधरी के पैतृक गांव बलिया में बोलते हुए यादव ने कहा कि अगर आदित्यनाथ को अयोध्या के लोगों का समर्थन मिलने का भरोसा है, तो उन्हें इस मंदिर शहर से चुनावी मैदान में उतरना चाहिए। मीडिया से बात करते हुए यादव ने साफ़ किया कि इसे चुनौती न समझें। यह उन्हें दी गई एक राजनीतिक सलाह थी। अगर अयोध्या के लोगों के साथ उनका तालमेल इतना अच्छा है, और अगर उन्होंने कहा है कि 15 दिनों में सच सामने आ जाएगा, तो उन्हें उनके बीच से ही अगला चुनाव लड़ने का फ़ैसला करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अयोध्या के लोग विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन शहर को एक अंतरराष्ट्रीय पहचान और मान्यता मिल सकती थी। यादव ने कहा कि अयोध्या के लोगों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया है। उन्होंने मंदिर में चढ़ावे को लेकर लगाए गए आरोपों की आलोचना करते हुए कहा, “मंदिर के बाहर बैठा भिखारी भी चढ़ावा नहीं चुराता। यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भरोसा जताते हुए कहा, “2027 में बदलाव होगा।”
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अयोध्या के निवासियों के साथ अनुचित व्यवहार नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि उनकी दुकानें छीन ली गईं, उनके घर तोड़ दिए गए और उनकी ज़मीन ले ली गई। लेकिन उन्हें बाज़ार भाव के हिसाब से मुआवज़ा नहीं दिया गया। इसीलिए मैंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री अयोध्या को लेकर इतने सहज हैं, तो उन्हें यह फ़ैसला लेना चाहिए। यह कोई चुनौती नहीं है, बल्कि एक सलाह है।
इसके अलावा, यादव ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने उनकी मोल-भाव करने की ताकत कम कर दी है। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शनकारियों के प्रस्तावित प्रदर्शन के बारे में यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी उस संगठन को अपना नैतिक समर्थन देती है। उन्होंने कहा कि हमारा नैतिक समर्थन उनके साथ है। यह पहले भी था और आज भी है।
