आने वाले केंद्रीय बजट में शेयर बाजार से होने वाली कमाई पर लगने वाले कर में बदलाव होगा या नहीं, इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फिलहाल कुछ भी साफ कहने से इनकार किया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि बजट की तैयारी शुरू हो चुकी है और इस समय यह बताना ठीक नहीं होगा कि सरकार किन प्रस्तावों पर विचार करेगी। हालांकि, उन्होंने माना कि देश और विदेश के निवेशक पूंजीगत लाभ कर और अलग-अलग तरह के निवेश पर लगने वाले कर को लेकर अपनी राय रख रहे हैं और सरकार उनके सुझाव सुनने के लिए तैयार है।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026 में बातचीत के दौरान सीतारमण ने यह बात कही। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकाल रहे हैं। एक दिन पहले भारतीय स्टेट बैंक के शोध विभाग ने सुझाव दिया था कि शेयरों में लंबे समय तक निवेश को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर खत्म करने पर विचार किया जाना चाहिए।
एसबीआई के शोध विभाग का मानना है कि शेयरों को रखने की न्यूनतम अवधि बढ़ाकर 2 से 3 साल की जा सकती है और इसके साथ दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर हटाया जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे अल्पकालिक मुनाफे के लिए आने वाले निवेश पर नियंत्रण रखने और विदेशी निवेश के प्रवाह को स्थिर बनाने में मदद मिल सकती है। रिपोर्ट में दिए आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में रिपोर्ट जारी होने तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 44,166 करोड़ रुपये निकाले थे। इसके साथ ही 2026 में उनकी कुल निकासी बढ़कर 3.04 लाख करोड़ रुपये हो गई थी।
बता दें कि फिलहाल विदेशी निवेशकों के लिए शेयरों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर की दर 12.5 प्रतिशत है। बजट 2026 में लिस्टेड शेयरों और शेयर आधारित म्यूचुअल फंड पर इस दर को बरकरार रखा गया था। यह व्यवस्था 2024 में लागू किए गए बदलावों के बाद से जारी है। शोध विभाग ने निर्यात से होने वाली कमाई को देश में वापस लाने की प्रक्रिया आसान करने और इसके लिए करीब 6 महीने की उचित समयसीमा तय करने का सुझाव भी दिया है। साथ ही, विदेशी वाणिज्यिक उधारी पर स्रोत पर कर कटौती के नियमों को अधिक स्पष्ट बनाने की मांग की गई है।
वित्त मंत्री ने रुपये की गिरती कीमत पर भी बात की। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का उद्देश्य रुपये को किसी खास स्तर पर बनाए रखना नहीं, बल्कि उसकी कीमत में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को रोकना है। सीतारमण ने माना कि पिछले 18 महीनों में रुपये पर काफी दबाव रहा है, लेकिन उन्होंने भारत की आर्थिक स्थिति और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बताया। रिजर्व बैंक ने डॉलर की मांग को संभालने के लिए तेल कंपनियों को विशेष सुविधा देने, विदेशी मुद्रा के वायदा कारोबार के नियम सख्त करने और कुछ डॉलर खरीद पर आरक्षित राशि से जुड़े नियम लागू करने जैसे कदम उठाए हैं। इन प्रयासों के बाद सोमवार को रुपये में करीब 1 प्रतिशत की बढ़त आई और मंगलवार को शुरुआती कारोबार में यह डॉलर के मुकाबले 94.96 रुपये पर पहुंच गया।
गौरतलब है कि सीतारमण ने निवेश के अन्य क्षेत्रों को भी अहम बताया। उन्होंने बुनियादी ढांचे, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, दवाओं और नई तकनीकों में अवसरों का जिक्र किया। उनके अनुसार, देश की राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा योजना का आकार 4.5 लाख करोड़ डॉलर से अधिक हो चुका है। एआई और डेटा केंद्रों के विस्तार के लिए ज्यादा बिजली, मजबूत बिजली नेटवर्क और स्वच्छ ऊर्जा की जरूरत होगी। उन्होंने राष्ट्रीय अवसंरचना वित्तपोषण एवं विकास बैंक और राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। वित्त मंत्री के मुताबिक, देश का नागरिक विमानन क्षेत्र करीब 16 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जिससे विमान रखरखाव और उससे जुड़ी सेवाओं में निवेश के नए अवसर बन रहे हैं। सरकार ने सामाजिक कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च के साथ वित्तीय अनुशासन और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है।
