रमेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि राजीव गांधी ने इसके लिए जमीनी स्तर पर काम किया था और संविधान में इस प्रावधान को शामिल कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने कहा, ‘‘सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 सर्वसम्मति से पारित किया गया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण तत्काल लागू किया जाना चाहिए।’’ रमेश ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल बार-बार मांग करते रहे हैं कि महिलाओं के लिए आरक्षण लोकसभा की मौजूदा 543 सदस्यीय संख्या के आधार पर लागू किया जाए।
इसका मतलब है कि महिलाओं के लिए 182 सीटें आरक्षित की जाएं। उन्होंने कहा कि अचानक, 16 अप्रैल 2026 को रात 11 बजे, जब संसद में परिसीमन के मुद्दे पर विचार-विमर्श चल रहा था, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को अधिसूचित कर दिया गया। रमेश ने कहा कि सरकार की दिलचस्पी केवल महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने में है।
उन्होंने कहा कि सरकार ‘‘दागी दो-तिहाई बहुमत’’ हासिल करने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को मानसून सत्र में भी पेश नहीं किया जा सका। रमेश ने कहा, ‘‘उनके पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है और उन्हें यह बहुमत कभी नहीं मिलेगा।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को बार-बार लाल किले से ‘‘उपदेश देने’’ और यह ‘‘नाटक’’ करने के बजाय 2029 के लोकसभा चुनाव से ही मौजूदा लोकसभा की सदस्य संख्या के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री का एकमात्र एजेंडा ‘महिलाओं को आरक्षण नहीं, बल्कि मोदी को बचाना’ है।’’ रमेश की यह टिप्पणी मोदी द्वारा विपक्षी दलों से परिसीमन से जुड़े महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने की अपील के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह मुद्दा पिछले 40 वर्षों से राजनीतिक अखाड़े में फंसा हुआ है।
विस्तारित बजट सत्र के दौरान लाया गया संविधान संशोधन विधेयक 2029 में विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने तथा लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने से संबंधित था। प्रस्तावित विधेयक को निचले सदन में पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी था। हालांकि, विपक्षी दलों के विरोध के बीच विधेयक पारित नहीं हो सका।