भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) में पदोन्नति (Promotion) के नए नियमों को लेकर विवाद गहरा गया है। आरबीआई के अधिकारियों के सबसे बड़े संगठन, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन (आरबीआईओए) ने नई पदोन्नति नीति के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शुक्रवार को देशव्यापी प्रदर्शन किया। संगठन ने आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

आरबीआई के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों और मुंबई स्थित केंद्रीय मुख्यालय में कार्यरत अधिकारियों ने शुक्रवार को नई पदोन्नति नीति के खिलाफ प्रदर्शन किया। नई नीति में पदोन्नति को रिक्तियों की उपलब्धता से जोड़ा गया है, जबकि पहले समयबद्ध पदोन्नति प्रणाली लागू थी।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ऑफिसर्स एसोसिएशन (आरबीआईओए) ने आठ मई के पत्र में कहा कि केंद्रीय बैंक ने उनकी गंभीर चिंताओं, आपत्तियों और रचनात्मक सुझावों पर पर्याप्त विचार किए बिना संशोधित पदोन्नति नीति को लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे अधिकारी समुदाय में व्यापक असंतोष, निराशा और मनोबल में गिरावट आई है। संगठन ने कहा कि विभिन्न ग्रेड में पदोन्नति रुकने से विशेषकर युवा अधिकारियों में असंतोष बढ़ रहा है, जिन्हें लंबे समय तक एक ही पद पर बने रहने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। पत्र में कहा गया है कि पूर्व में विभिन्न बैठकों में गवर्नर ने समयबद्ध पदोन्नति की संभावना का संकेत दिया था, लेकिन अंतिम नीति में इस पहलू को शामिल नहीं किया गया।

आरबीआईओए के अनुसार, लगभग 8,000 आरबीआई अधिकारी इस बदलाव से प्रभावित हो सकते हैं। संगठन ने मांग की कि संशोधित नीति को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए और आरबीआईओए के साथ विस्तृत परामर्श कर इसकी समीक्षा की जाए। आरबीआईओए ने कहा, “हम शीर्ष प्रबंधन से अनुरोध करते हैं कि इस मामले पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए और सगठन के साथ परामर्श कर संशोधित पदोन्नति नीति की व्यापक समीक्षा शुरू की जाए, ताकि अधिकारियों के करियर विकास के लिए एक निष्पक्ष, संतुलित और टिकाऊ ढांचा तैयार किया जा सके।

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