पश्चिम एशिया में जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य और आर्थिक टकराव तेज हो गया है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। हाल के घटनाक्रमों से संकेत मिलता है कि स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है और किसी भी समय व्यापक संघर्ष का रूप ले सकती है।

ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसिन रजाई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका जमीनी हमला करता है तो ईरान हजारों अमेरिकी सैनिकों को बंधक बना सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि प्रत्येक बंधक के बदले भारी आर्थिक कीमत वसूली जाएगी। मोहसिन रजाई ने यह भी दावा किया कि यदि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नाकाबंदी जारी रखी, तो ईरान अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बना सकता है और उन्हें नष्ट कर सकता है।

ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहसिन रजाई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका जमीनी हमला करता है तो ईरान हजारों अमेरिकी सैनिकों को बंधक बना सकता है। उन्होंने यहां तक कहा कि प्रत्येक बंधक के बदले भारी आर्थिक कीमत वसूली जाएगी। मोहसिन रजाई ने यह भी दावा किया कि यदि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नाकाबंदी जारी रखी, तो ईरान अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बना सकता है और उन्हें नष्ट कर सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उसके आर्थिक और समुद्री अधिकार पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते, वह इस रणनीतिक जलमार्ग से पीछे नहीं हटेगा।

 

इसी बीच, अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए उसके बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखी है। यह नाकाबंदी लगातार तीसरे दिन भी जारी रही, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि कोई भी जहाज यदि ईरान के समर्थन में गतिविधि करेगा या अमेरिकी बलों पर हमला करेगा, तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा।

उधर, ईरान के विदेश मंत्री ने भी अमेरिका की कार्रवाइयों को उकसाने वाला बताते हुए चेतावनी दी है कि इसके गंभीर और खतरनाक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी और होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी कदम पहले से ही जटिल स्थिति को और अधिक बिगाड़ सकते हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के प्रस्ताव को एकतरफा और अविवेकपूर्ण करार दिया और चीन तथा रूस के समर्थन की सराहना की।

 

कुल मिलाकर देखें तो पश्चिम एशिया में स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। एक ओर जहां सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान निकलता है या क्षेत्र एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ता है।

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