एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग के स्वागत के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। तो वहीं दूसरी तरफ ट्रंप से ठीक मुलाकात से पहले बीजिंग से एक ऐसा कड़ा संदेश सामने आया जिसने पूरी दुनिया के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। चीन ने ताइवान के मुद्दे पर अमेरिका को साफ-साफ चेता दिया है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका की यात्रा पर रहेंगे। पिछले चार महीने में दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात होगी। इससे पहले वे मई में पेइचिंग में मिले थे। चीन ने इस घटनाक्रम को ऐतिहासिक करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने सोमवार को घोषणा की कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर शी चिनफिंग अमेरिका की तीन दिवसीय यात्रा करेंगे। गुओ ने कहा कि ट्रंप के साथ शिखर सम्मेलन में शी चीन-अमेरिका संबंधों, विश्व शांति और विकास से जुड़े अहम मुद्दों मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करेंगे। हांगकांग के ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ की एक खबर के अनुसार, शी जॉइंट बेस एंड्रयूज में एक हवाई पट्टी पर उतरेंगे। ट्रंप के वहां व्यक्तिगत रूप से उनका खास स्वागत करने की योजना है, जो बेहद दुर्लभहै। आम तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप विदेशी अतिथियों से वाइट हाउस में मिलते हैं।
अमेरिका ने चीन के सामने AI से जुड़ी ऐसी घटनाओं की जानकारी साझा करने के लिए एक नया ‘अधिसूचना तंत्र’ बनाने का प्रस्ताव रखा है। न्यू यॉर्क में चीन के डिप्टी पीएम हे लिफेंग से बातचीत के बाद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि दोनों देश साझा लक्ष्यों और खतरों को लेकर एक जैसी समझ विकसित करना चाहते है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होने वाली इस बेहद अहम और बहुप्रतीक्षित मुलाकात से ठीक पहले चीन ने ताइवान को लेकर अपना रुख एक बार फिर पूरी तरह से साफ कर दिया है। चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य पत्र पीपल्स डेली ने अपने लेख में ताइवान को अमेरिका के साथ संबंधों में सीधी रेड लाइन करार दिया है। बीजिंग का साफ कहना है कि ताइवान के मुद्दे पर वह किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं करेगा। और इतना ही नहीं चीन ने अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियारों की बिक्री और सैन्य संबंधों पर भी तीखा विरोध जताया है।
क्यों अहम है ये मुलाकात
ये वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 % तक टैरिफ लगाने वाला बिल साइन किया है।
चीन ने इसे खारिज कर कहा था कि देशों के बीच सामान्य व्यापारिक सहयोग में तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
ईऱान संघर्ष का मुद्दा भी उठ सकता है। आरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागचनी ने पिछले सप्ताह चीन में कहा था कि ईरान कूटनीतिक रास्ते पर लौटने की उम्मीद करता है।
संभावना ये भी है कि ट्रंप चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग से रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर यूक्रेन में युद्ध रोकने के लिए दबाव डालने की अपील कर सकते हैं।
ये भी उम्मीद जताई जा रही है कि शी जिनपिंग, डोनाल्ड ट्रंप से ताइवान को एन अमेरिकी हथियारों की बिक्री आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह कर सकते हैं।
