भारत के हिंदू पायलट कैप्टन स्मिथ मछार पर हुए हमले और उनकी बहादुरी को देख फ्रांस की सबसे बड़ी एयरलाइंस, यानी एयर फ्रांस ने एक बड़ा फैसला किया है। एयर फ्रांस को समझ आ गया है कि उनके हर विमान में कैप्टन स्मिथ मछार जैसा जांबाज़ पायलट नहीं हो सकता। ऐसे में एयर फ्रांस ने 31 देशों के मुस्लिम पायलट्स पर कड़ा रुख अपनाया है, जिसमें खासतौर पर पाकिस्तान के पायलटों का जिक्र है। फैसले के मुताबिक, पाकिस्तान समेत 31 देशों के मुस्लिम पायलट्स और क्रू मेंबर्स उन उड़ानों में शामिल नहीं होंगे जो इजराइल जा रही हों या फिर इजराइल के हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) के ऊपर से गुजर रही हों।

दरअसल, इजराइल के परिवहन मंत्रालय ने 1 अक्टूबर 2026 को एक नया नियम लागू किया है। इसके तहत जिन देशों के इजराइल के साथ औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, उन देशों के पायलट्स और क्रू मेंबर्स को इजराइली हवाई क्षेत्र के आसपास आने की अनुमति नहीं होगी। इनमें अधिकांश मुस्लिम देश हैं, जिनमें पाकिस्तान, ईरान, ओमान, नाइजर, सऊदी अरब, अल्जीरिया और ट्यूनीशिया जैसे नाम शामिल हैं। इजराइल और एयरलाइंस द्वारा यह सख्ती फ्लाईदुबई की फ्लाइट में स्मिथ मछार पर हुए आतंकी हमले के बाद बरती जा रही है। कैप्टन मछार पर हमला करने वाला सह-पायलट ओमान का हमाम अल हमामी था। पूछताछ में हमामी ने खुलासा किया कि उसने काफी पहले से फ्लाईदुबई में शामिल होने की योजना बनाई थी ताकि वह तेल अवीव जाने वाली उड़ानों का हिस्सा बन सके। उसने बैन गुरियन एयरपोर्ट का दौरा खुफिया जानकारी जुटाने के मकसद से किया था।

हमामी ने बताया कि उसने जुलाई में ही हमले की योजना बना ली थी, लेकिन क्रू मेंबर से दोस्ती के कारण तब इसे टाल दिया था। बाद में, जब उसकी फ्लाइट में पायलट स्मिथ मछार आए, तो उसने अपनी साजिश को दोबारा अंजाम देने की कोशिश की। उसका इरादा कॉकपिट में स्मिथ मछार की हत्या कर विमान को बैन गुरियन एयरपोर्ट, किसी इमारत या दूसरे विमान से टकराने का था। यदि वह इजराइल तक नहीं पहुंच पाता, तो उसका बैकअप प्लान जॉर्डन में स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेस से प्लेन को टकराने का था। उसकी इस खतरनाक साजिश को समय रहते नाकाम कर कैप्टन स्मिथ मछार ने एक बड़ी तबाही टाल दी।

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