फोटो परिचय- धुंध और प्रदूषण के बीच से गुजरते लोग।
– 335 के पार पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक, प्रदूषण ने बढ़ाई लोगों की चिंता
– धूल, धुआं और धुंध के बीच बच्चों व बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर मंडराया खतरा
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। मौसम में बदलाव के साथ ही जिले की हवा भी प्रदूषण की चपेट में आती जा रही है। वातावरण में बढ़ते जहरीले कणों ने लोगों की सेहत को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालात यह हैं कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 335 के पार पहुंच गया है। इसके चलते शहर की हवा बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की जा रही है। सुबह और शाम आसमान में छाई धुंध के बीच वातावरण में धुएं की परत साफ दिखाई देने लगी है।
शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। सड़कों पर उड़ती धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों के दौरान उड़ने वाले धूल के कण और कूड़ा जलाने जैसी गतिविधियां हवा को दूषित कर रही हैं। वहीं धान की कटाई के सीजन में फसल अवशेष जलाए जाने की आशंका भी प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ा रही है। हालांकि प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों की वास्तविक हिस्सेदारी का पता वैज्ञानिक निगरानी से ही चल सकेगा।
प्रदूषण का मौजूदा स्तर आम जनजीवन के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। इसका सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस अथवा हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ सकता है। एक्यूआई का 301 से 400 के बीच होना बेहद खराब श्रेणी माना जाता है। ऐसी स्थिति में लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से खांसी, गले में खराश, आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं।
खेतों में फसल अवशेषों के निस्तारण के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए जिले में अनुश्रवण सेल का गठन किया गया है। इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल निगरानी पर्याप्त नहीं है, बल्कि धरातल पर सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। शहर की सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के इंतजाम, खुले में कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई जरूरी है।
बिगड़ते हालात के बीच प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने शहर की आबोहवा सुधारने की बड़ी चुनौती है। वहीं आम लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषण का स्तर अधिक रहने पर बच्चों और बुजुर्गों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। सांस और हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। शहरवासियों को अब स्वच्छ हवा के लिए प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
