फोटो परिचय- जमीन विवाद में न्याय की गुहार लगाते पीड़ित रामचंद्र सिंह।
– हथगाम के पलिया बुजुर्ग गांव में सहन की जमीन और तालाब की भूमि पर अवैध निर्माण कराने का आरोप
– डीएम, एसपी और मुख्यमंत्री तक पहुंची शिकायत, वर्ष 2019 से सिविल कोर्ट में भी विचाराधीन है मामला
सिटी न्यूज फतेहपुर
फतेहपुर(CNF)। जमीन संबंधी विवाद का निस्तारण कराने के लिए एक बुजुर्ग पिछले करीब नौ वर्षों से प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहा है। हथगाम थाना क्षेत्र के पलिया बुजुर्ग गांव निवासी रामचंद्र सिंह का आरोप है कि उनकी जमीन के साथ सहन की भूमि पर जबरन निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने तालाब की जमीन पर भी कब्जा कर निर्माण कराने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित रामचंद्र सिंह पुत्र स्वर्गीय वासुदेव सिंह ने बताया कि वह अपनी पत्नी रीना सिंह के साथ गांव में रहते हैं। उनके तीन बेटे हैं, जो इंजीनियरिंग, सेना और आईटी प्रोसेस मैनेजमेंट के क्षेत्र में कार्यरत हैं। नौकरी के सिलसिले में तीनों बाहर रहते हैं। रामचंद्र सिंह के मुताबिक, वर्ष 2018 में उन्होंने गार्ड की नौकरी छोड़कर गांव लौटने का फैसला किया था, ताकि जमीन से जुड़े विवाद को सुलझा सकें, लेकिन इतने वर्षों बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका।
समझौते के बावजूद निर्माण कराने का आरोप
रामचंद्र सिंह का कहना है कि वर्ष 2018 में उनके घर के सामने रहने वाले मुकेश सिंह ने कथित तौर पर उनकी चरही तोड़कर दरवाजा लगा दिया था। इस मामले को लेकर पुलिस चौकी और थाने में तीन बार लिखित समझौता हुआ। आरोप है कि समझौते में दोनों पक्षों ने किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं करने की बात स्वीकार की थी। इसके बावजूद उनकी सहन की जमीन पर मकान बनवाने का प्रयास किया जा रहा है।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर दूसरे पक्ष के लोगों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। परिवार की सुरक्षा को लेकर घर के बाहर सीसीटीवी कैमरे भी लगवाने पड़े।
1961 के बंटवारे का दिया हवाला
रामचंद्र सिंह के अनुसार, उनके पिता स्वर्गीय वासुदेव सिंह और उनके चाचा के बीच वर्ष 1961 में घर और जमीन का बंटवारा हुआ था। उनका दावा है कि लेखपाल की मौजूदगी में सभी को उनके हिस्से की जमीन दी गई थी और तभी से संबंधित लोग अपने-अपने हिस्से पर काबिज हैं। इसके बावजूद उनकी जमीन और सहन की भूमि पर जबरन निर्माण कराए जाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने तालाब की भूमि पर भी कब्जे और निर्माण का आरोप लगाया है।
मुख्यमंत्री तक पहुंचाई शिकायत
पीड़ित का कहना है कि विवाद को लेकर वर्ष 2019 से सिविल कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। वर्ष 2018 से लेकर 2026 तक वह जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, मुख्यमंत्री कार्यालय और आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से कई बार शिकायत कर चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है।
लगातार अधिकारियों के चक्कर काटने से परेशान रामचंद्र सिंह ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जमीन के अभिलेखों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने और नियमानुसार शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की है।
