फोटो परिचय- सीवर लाइन के लिए खोदी गई सड़क।
बिना एनओसी खुदाई का आरोप, खुली सड़कों पर हादसे का खतरा; बारिश ने खोल दी निर्माण व्यवस्था की पोल
बैरिकेडिंग से लेकर तकनीकी निगरानी तक सवालों के घेरे में, युवा विकास समिति ने मुख्य सचिव से मांगी जांच
CITY NEWS FATEHPUR
फतेहपुर(CNF)। शहर को सीवर सुविधा देने के नाम पर चल रही सड़क खुदाई अब लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। कहीं सड़क उखड़ी पड़ी है तो कहीं खुदाई के बाद बने गड्ढों में बारिश का पानी और कीचड़ जमा है। आवागमन बाधित होने के साथ ही दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के सामने हर समय दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सड़कें खोदने से पहले जरूरी अनुमतियों और सुरक्षा मानकों का कितना पालन किया गया?
सीवर लाइन निर्माण को लेकर युवा विकास समिति ने सीधे मुख्य सचिव से शिकायत कर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र मिश्रा की ओर से भेजे गए शिकायती पत्र में निर्माण कार्य की प्रक्रिया, तकनीकी निगरानी, सड़क खुदाई और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
खुदाई हुई, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था कहां गई?
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कई स्थानों पर सड़कें खोदने के बाद पर्याप्त बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत नहीं लगाए गए। ऐसे में रात के समय स्थिति और खतरनाक हो सकती है। स्थानीय लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि खुले और अधूरे हिस्सों के आसपास सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था कब होगी।
एनओसी के बिना सड़क खोदने का आरोप
समिति ने आरोप लगाया है कि कई स्थानों पर आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और विभागीय अनुमति की स्थिति स्पष्ट किए बिना सड़क खुदाई कराई गई। शिकायत में मांग की गई है कि प्रत्येक स्थान पर खुदाई से पहले ली गई अनुमतियों की जांच कराई जाए और यदि नियमों की अनदेखी सामने आए तो जिम्मेदारी तय की जाए।
पेटी ठेकेदारों पर भी उठी उंगली
निर्माण कार्य में पर्याप्त तकनीकी अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। समिति का आरोप है कि कई जगह पेटी ठेकेदारों के माध्यम से काम कराया जा रहा है। इससे निर्माण की गुणवत्ता और निर्धारित तकनीकी मानकों के पालन को लेकर स्थिति संदिग्ध होने का दावा किया गया है।
बारिश ने बढ़ाई मुसीबत
बारिश के बाद खुदाई वाले हिस्सों में पानी और कीचड़ भरने से समस्या और गंभीर हो गई है। कई जगह सड़क का स्वरूप ही बिगड़ गया है। राहगीरों को बच-बचाकर निकलना पड़ रहा है। यदि समय रहते खुदाई वाले स्थानों को सुरक्षित नहीं किया गया तो हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब शासन तय करेगा किसकी जिम्मेदारी
मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में समिति ने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच, जिम्मेदार अधिकारियों की मौके पर मौजूदगी, एनओसी और विभागीय अनुमतियों की जांच, मानक के अनुरूप बैरिकेडिंग, क्षतिग्रस्त सड़कों की गुणवत्तापूर्ण मरम्मत तथा जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है।
समिति ने यह भी मांग की है कि जांच में यदि निर्माण कार्य में लापरवाही, तकनीकी खामी या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित अधिकारी अथवा कार्यदायी संस्था के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सीवर लाइन बिछाना शहर की जरूरत है, लेकिन सवाल यह है कि विकास की इस कवायद में आम लोगों की सुरक्षा और सड़कों की हालत से समझौता तो नहीं किया जा रहा? अब इस शिकायत के बाद शासन स्तर पर जांच और कार्रवाई का इंतजार है।
