प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने किसानों, अक्षय ऊर्जा और राजधानी दिल्ली की यातायात व्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगा दी। बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी। उन्होंने बताया कि इन तीनों फैसलों से जुड़ा कुल वित्तीय प्रावधान 2 लाख 79 हजार 157 करोड़ रुपये का है।

हम आपको बता दें कि बैठक में लिए गये फैसलों का सबसे सीधा असर किसानों पर पड़ने वाला है। मोदी सरकार ने रबी विपणन सत्र 2027-28 के लिए छह प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य को मंजूरी दी है। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय इस मूल्य व्यवस्था में उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत का लाभांश सुनिश्चित करने सहित लागत, फसलों के बीच आय का संतुलन, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें, मांग-आपूर्ति तथा कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र के बीच व्यापारिक संबंधों जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा गया है।

नई व्यवस्था के तहत गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,610 रुपये प्रति क्विंटल, जौ का 2,286 रुपये, चने का 5,958 रुपये, मसूर का 7,390 रुपये, सरसों का 6,613 रुपये और कुसुम का 7,215 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। सरकार के अनुमान के मुताबिक रबी विपणन सत्र 2027-28 में 324 लाख मीट्रिक टन उपज के लिए किसानों को करीब 90,962 करोड़ रुपये का भुगतान अनुमानित है।

दूसरा बड़ा फैसला अक्षय ऊर्जा के मोर्चे पर है। मंत्रिमंडल ने पीएम धारा योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत कुल 1 लाख 86 हजार 405 करोड़ रुपये का परियोजना व्यय होगा, जिसमें 54 हजार 82 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता शामिल है। योजना का उद्देश्य देश में अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ उसके लिए जरूरी पारेषण व्यवस्था को मजबूत करना है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना है, जबकि 2035-36 तक 786 गीगावाट क्षमता की योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत 135 गीगावाट अक्षय ऊर्जा के पारेषण और 50 गीगावाट-घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण व्यवस्था विकसित की जाएगी। राज्यों की पारेषण उपयोगिता एजेंसियां इसे लागू करेंगी। नई पारेषण लाइनों का निर्माण प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए होगा, जबकि मौजूदा नेटवर्क के उन्नयन के लिए लागत आधारित व्यवस्था अपनाई जाएगी।

तीसरा और दिल्ली से सीधे जुड़ा फैसला एकीकृत यातायात प्रबंधन प्रणाली को मंजूरी देना है। इसके लिए 1,790 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार के मुताबिक दिल्ली की 1,529 यातायात बत्तियां अभी निश्चित समय-सारिणी और मानवीय हस्तक्षेप पर निर्भर हैं तथा जाम बढ़ने पर स्वतः प्रतिक्रिया नहीं दे पातीं। नई व्यवस्था में यातायात नियंत्रण, नियमों का पालन, वास्तविक समय की यातायात जानकारी और मार्ग परिवर्तन को एक ही तकनीकी मंच से जोड़ा जाएगा।

यह परियोजना 24 महीने में तीन चरणों में लागू होगी। पहले चरण में पांच मार्गों पर 250 स्मार्ट यातायात बत्तियां और मुख्य नियंत्रण केंद्र, दूसरे चरण में सात मार्गों पर 222 स्मार्ट यातायात बत्तियां तथा आपदा पुनर्प्राप्ति व्यवस्था और तीसरे चरण में 30 मार्गों पर 620 स्मार्ट यातायात बत्तियां लगाई जाएंगी। इसके बाद पांच वर्षों तक रखरखाव किया जाएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित व्यवस्था यातायात उल्लंघनों की पहचान करने के साथ चोरी या वांछित वाहनों की पहचान में भी मदद करेगी। इस तरह मोदी सरकार के आज के फैसलों का फोकस किसान की आय, ऊर्जा ढांचे के विस्तार और दिल्ली की यातायात व्यवस्था के आधुनिकीकरण पर साफ तौर पर दिखाई देता है।

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