फोटो परिचय-  कलेक्ट्रेट में वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने पहुंचे व्यापार मंडल के पदाधिकारी।

– व्यापार मंडल ने जिला प्रशासन के जरिए भेजा ज्ञापन, शून्य एमडीआर व्यवस्था कायम रखने पर दिया जोर
– छोटे कारोबारियों को शुल्क से बचाने और जीएसटी संबंधी प्रावधानों की समीक्षा की उठी मांग

CITY NEWS FATEHPUR

फतेहपुर(CNF)। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली यूपीआई व्यवस्था में व्यापारिक लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाए जाने की संभावित व्यवस्था ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। इसी मुद्दे को लेकर उत्तम उद्योग व्यापार मंडल ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर वित्त मंत्री, भारत सरकार के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों ने प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार करते हुए छोटे एवं मध्यम कारोबारियों को राहत देने की मांग की।

व्यापार मंडल पदाधिकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से भुगतान का चलन तेजी से बढ़ा है। इससे व्यापारियों और ग्राहकों के बीच लेनदेन आसान होने के साथ नकदी रखने, बैंक तक पहुंचाने, एटीएम संचालन तथा सुरक्षा संबंधी खर्च में भी कमी आई है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से कारोबारियों की लागत बढ़ने की आशंका है।

व्यापारियों ने विशेष रूप से एमडीआर पर प्रस्तावित 18 प्रतिशत जीएसटी को लेकर आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना है कि छोटे व्यापारियों के लिए यदि इस शुल्क पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलता है तो अतिरिक्त कर सीधे उनके व्यापारिक खर्च में जुड़ जाएगा। कम लाभांश पर कारोबार करने वाले दुकानदारों पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ने की बात भी ज्ञापन में कही गई।

सीमा बढ़ाने का भी दिया सुझाव

व्यापार मंडल ने व्यापारिक लेनदेन के लिए मौजूदा शून्य एमडीआर व्यवस्था को जारी रखने की मांग की है। साथ ही शून्य एमडीआर की सीमा 2000 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 10 हजार रुपये किए जाने का सुझाव दिया गया। छोटे कारोबारियों के हित में मासिक टर्नओवर की सीमा भी एक लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये करने की मांग रखी गई।

पदाधिकारियों ने कहा कि किसी भी नई शुल्क व्यवस्था को लागू करने से पहले व्यापारिक संगठनों, छोटे कारोबारियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना चाहिए। उन्होंने डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापारियों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की।

इसके अलावा जीएसटी, आयकर अनुपालन, बैंकिंग शुल्क और एमडीआर से जुड़े विषयों का व्यावहारिक अध्ययन कराने के लिए व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक समिति गठित करने का सुझाव दिया गया। व्यापारियों ने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे छोटे दुकानदारों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव न पड़े।

ज्ञापन देने वालों में प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण कुमार तिवारी, जिलाध्यक्ष मनोज साहू, श्रवण दीक्षित, प्रेमदत्त उमराव, जय किशन, संदीप श्रीवास्तव, सलामत अली, राजेंद्र, भंवर, सौरभ गुप्ता और इसराइल समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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