एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से मानवाधिकार वकील ईमान मज़ारी-हाज़िर और हादी अली चट्टा को तुरंत और बिना किसी शर्त के रिहा करने की अपील की है। इन दोनों वकीलों को दोषी ठहराए जाने और लंबे समय तक जेल में रखे जाने से असहमति की आवाज़ दबाने के लिए साइबर क्राइम कानूनों के गलत इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में एमनेस्टी ने कहा कि इन दोनों वकीलों को 23 जनवरी, 2026 को गिरफ़्तार किया गया था, जबकि उन्हें दो दिन पहले ही गिरफ़्तारी से पहले ज़मानत (pre-arrest bail) मिल चुकी थी। अगले ही दिन, इस्लामाबाद की ज़िला और सत्र अदालत ने उन्हें ‘प्रिवेंशन ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट’ (PECA) के प्रावधानों के तहत 10 से 17 साल की सज़ा सुनाई। इन प्रावधानों में साइबर आतंकवाद, किसी अपराध का महिमामंडन करने और कथित तौर पर गलत या फ़र्ज़ी जानकारी फैलाने से जुड़ी धाराएं शामिल थीं।
एमनेस्टी के अनुसार, ये आरोप मुख्य रूप से सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े थे; चट्टा पर ईमान की पोस्ट को दोबारा शेयर करने के लिए भी मुक़दमा चलाया गया था। मानवाधिकार संगठन ने कहा कि मुक़दमे की सुनवाई “असामान्य जल्दबाज़ी” में की गई और वकीलों को बार-बार गवाहों से जिरह करने और सबूत पेश करने का मौका नहीं दिया गया, जिससे निष्पक्ष सुनवाई को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा हुईं। उनकी सज़ा पर रोक लगाने की अपील और अर्ज़ियों में तब से काफ़ी देरी हुई है। एमनेस्टी ने कहा कि 12 मई को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह सज़ा पर रोक लगाने की अर्ज़ियों पर दो हफ़्ते के भीतर फ़ैसला करे। हालाँकि, संगठन का कहना है कि उनकी अपील पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है।
एमनेस्टी ने कहा कि लगातार देरी उनके अपील करने के अधिकार का उल्लंघन हो सकती है और आरोप लगाया कि उन्हें हिरासत में रखने की अवधि बढ़ाने के लिए प्रक्रियात्मक बाधाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। एमनेस्टी ने जेल में मज़ारी-हाज़िर की बिगड़ती सेहत पर भी चिंता जताई। संगठन ने बताया कि उन्हें मसूड़ों से ज़्यादा ब्लीडिंग, दांत और पेट से जुड़ी समस्याओं और छाती में संक्रमण का सामना करना पड़ा है, जबकि उन्हें सही इलाज मिलने में भी मुश्किलें आ रही हैं। बताया जाता है कि उनके परिवार ने डेंटिस्ट से सलाह लेने के बाद दवाएँ भेजी थीं, लेकिन उनमें से सभी दवाएँ उन तक नहीं पहुँच पाईं।
