सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश को चार छोटे राज्यों में बांटना तय है। अंबेडकर नगर में बोलते हुए राजभर ने कहा कि भविष्य में किसी भी चुनावी गठबंधन के लिए यह ज़रूरी होगा कि प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य का मुख्यमंत्री राजभर समुदाय से ही हो। राजभर ने इस दावे के आधार के तौर पर पूर्वी इलाके में राजभर समुदाय की आबादी और उनके वोटों की बड़ी हिस्सेदारी का ज़िक्र किया।

 

राजभर ने कहा कि राज्य का बंटवारा तय है। जब राज्य का बंटवारा होगा—जिसमें पूर्वांचल, मध्यांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश जैसे इलाके शामिल होंगे—तो अगर आप उस इलाके को देखें जहां हम अभी बैठे हैं, यानी अंबेडकर नगर से शुरू करते हुए, तो पूरे पूर्वांचल इलाके में राजभर समुदाय के वोटों की हिस्सेदारी सबसे ज़्यादा है। इसलिए, गठबंधन करने वाली किसी भी पार्टी के लिए यह पहले से तय शर्त होगी कि भविष्य के पूर्वांचल राज्य का मुख्यमंत्री राजभर समुदाय से ही होगा।

 

उत्तर प्रदेश को बांटने के प्रस्ताव पर दशकों से राजनीतिक हलकों में बहस होती रही है। पूर्वी उत्तर प्रदेश का हिस्सा, पूर्वांचल, अपनी घनी आबादी और बेरोजगारी व पलायन जैसी चुनौतियों के लिए जाना जाता है, फिर भी इसका काफी राजनीतिक प्रभाव है। मध्य क्षेत्र में स्थित मध्यांचल या अवध प्रदेश में लखनऊ और कानपुर जैसे प्रमुख प्रशासनिक और आर्थिक केंद्र शामिल हैं। दक्षिण में स्थित बुंदेलखंड संसाधनों की कमी और सूखे की समस्याओं का सामना कर रहा है, और इसका विकास जल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर निर्भर है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बना हरित प्रदेश या पश्चिम प्रदेश, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के करीब होने और मजबूत कृषि बुनियादी ढांचे का लाभ उठाता है, जिससे तेजी से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।

राजभर की ये बातें 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले आई हैं, लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। 1955 में, बी.आर. अंबेडकर ने अपनी किताब ‘थॉट्स ऑन लिंग्विस्टिक स्टेट्स’ में उत्तर प्रदेश को तीन छोटे राज्यों में बांटने का सुझाव दिया था। इसके अलावा, 2011 में मायावती के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी सरकार ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्य को इन्हीं चार क्षेत्रों में बांटने का प्रस्ताव पारित किया था। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई नहीं की और यह अभी भी लागू नहीं हुआ है। फिलहाल, इस बंटवारे को लागू करने के लिए कोई आधिकारिक फैसला या विधायी पहल नहीं की गई है।

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