उत्तर प्रदेश की राजनीति चुनावी मोड में प्रवेश कर चुकी है। एक तरफ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों और राजनीति प्रभाव को लेकर खींचतान के संकेत दिखाई दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और वैश्विक व्यापार का बड़ा मंच सजाया गया है। इसी माहौल में उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रदर्शनी के चौथे संस्करण का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के विकास की तस्वीर पेश की। दोनों नेताओं के भाषणों में साफ तौर पर कानून-व्यवस्था, निवेश, विनिर्माण, निर्यात और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने को प्रमुखता दी गई।
अमित शाह ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश के पुराने और वर्तमान औद्योगिक परिदृश्य की तुलना करते हुए कहा कि कभी यहां अपराध की उद्योग जैसी व्यवस्था की चर्चा होती थी, शहरों में वाहन चोरी के कुटीर उद्योग और अवैध कट्टा निर्माण की बात होती थी, लेकिन आज उसी प्रदेश में कट्टा उद्योग की जगह रक्षा गलियारा, वाहन चोरी की जगह वाहन निर्माण और चेन झपटमारी की जगह चिकित्सा उपकरण पार्क दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के दौर में कानून-व्यवस्था, औद्योगिक नीति और निवेश के अनुकूल वातावरण ने उत्तर प्रदेश को निवेश के बड़े केंद्र के रूप में स्थापित किया है।
गृह मंत्री ने उत्तर प्रदेश के छह रक्षा गलियारा केंद्रों- झांसी, चित्रकूट, लखनऊ, आगरा, अलीगढ़ और कानपुर, का उल्लेख करते हुए रक्षा उत्पादन में प्रदेश की भूमिका रेखांकित की। उन्होंने कहा कि देश का रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है और रक्षा निर्यात में 2013-14 की तुलना में 56 गुना वृद्धि हुई है। अमेठी में एके-203 राइफल के निर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे बदलते औद्योगिक वातावरण का उदाहरण बताया।
अमित शाह ने एक जनपद-एक उत्पाद योजना को भी रोजगार और उद्यम से जोड़ते हुए भदोही के कालीन, फिरोजाबाद के कांच, सहारनपुर की काष्ठ कला, कन्नौज के इत्र और वाराणसी की रेशमी साड़ियों का उल्लेख किया। उनका कहना था कि जिन युवाओं को कभी रोजगार के लिए प्रदेश से बाहर जाना पड़ता था, उनके लिए अब उत्तर प्रदेश में ही रोजगार और उद्यम के अवसर बढ़ रहे हैं।
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी तस्वीर को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के उत्पादों, मजबूत आपूर्ति शृंखला और उद्यमियों की विश्वसनीयता पर दुनिया का भरोसा बढ़ रहा है।
योगी ने कहा कि प्रदेश में संभावनाओं की कभी कमी नहीं थी, जरूरत थी हुनर को सही माहौल और बाजार से जोड़ने की। उन्होंने पारंपरिक प्रतिभा और तकनीक के मेल को उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक पहचान से जोड़ा। उन्होंने कहा कि 79 उत्पादों को भौगोलिक संकेतक प्रमाणन मिल चुका है और 75 अन्य उत्पादों के लिए आवेदन किया गया है। एक जनपद-एक उत्पाद, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा और विश्वकर्मा श्रम सम्मान जैसी योजनाओं के जरिए कारीगरों को प्रशिक्षण, उपकरण, ऋण और बाजार से जोड़ने का दावा भी उन्होंने किया।
हम आपको बता दें कि इस बार व्यापार प्रदर्शनी में 90 देशों से 600 से अधिक विदेशी खरीदारों के पहुंचने और करीब डेढ़ लाख कारोबारी आगंतुकों के आने की संभावना जताई गई है। आयोजन में 2,400 से अधिक प्रदर्शक शामिल हैं।
दूसरी ओर इन आर्थिक दावों के बीच उत्तर प्रदेश का राजनीतिक मैदान भी गर्म है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 24 सितंबर को रायबरेली से अपनी पीडीए रथयात्रा शुरू की। खास बात यह रही कि रायबरेली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है। अखिलेश ने यात्रा के दौरान कांग्रेस के साथ गठबंधन को मजबूत बताया, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर राजनीतिक खींचतान की चर्चा भी जारी है।
कांग्रेस की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने अखिलेश की रायबरेली यात्रा के संदर्भ में कहा कि कांग्रेस भी सैफई और कन्नौज जा सकती है। यानी गठबंधन के भीतर ही राजनीतिक प्रभाव और जमीन को लेकर संदेशों का आदान-प्रदान तेज हो चुका है।
यही उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीति का दिलचस्प विरोधाभास है। एक तरफ चुनावी यात्राएं, सामाजिक समीकरण, गठबंधन और सीटों की बातचीत है; दूसरी तरफ सरकार ग्रेटर नोएडा से प्रदेश के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने का मंच तैयार कर रही है। एक तरफ विपक्ष अपनी राजनीति जमीन मजबूत करने में जुटा है, तो दूसरी तरफ योगी सरकार व्यापार, निर्यात, विनिर्माण और निवेश के आंकड़ों के जरिए अपनी विकास आधारित राजनीति को सामने रख रही है।
देखा जाये तो उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी लड़ाई आखिरकार किस मुद्दे पर केंद्रित होगी, यह आने वाला समय तय करेगा। फिलहाल तस्वीर में दो अलग-अलग राजनीतिक आख्यान आमने-सामने हैं। एक ओर सामाजिक और चुनावी समीकरणों की कवायद और दूसरी ओर विकास, निवेश, रोजगार तथा वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी बढ़ाने का दावा है। ग्रेटर नोएडा का व्यापार प्रदर्शनी मंच इसी दूसरे आख्यान को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के सामने पेश करता दिखाई दे रहा है।
