पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि अगर अमेरिका अपना सैन्य दबाव कम करे और नाकेबंदी हटा ले, तो ईरान सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए तैयार है। इस प्रस्ताव के ज़रिए ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत फिर से शुरू करने की अपनी इच्छा ज़ाहिर की है। खबरों के मुताबिक, यह प्रस्ताव मध्यस्थों के ज़रिए वॉशिंगटन तक पहुँचाया गया है। तेहरान की योजना है कि वह न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली के दौरान मध्यस्थ देशों के साथ इस पहल पर चर्चा करे। क्योडो न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारी ने राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मुलाक़ात की संभावना को खारिज कर दिया, लेकिन कहा कि “किसी समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना है, बशर्ते वॉशिंगटन गंभीरता और प्रतिबद्धता दिखाए।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे टकराव का असर एनर्जी मार्केट और ग्लोबल शिपिंग पर पड़ा है, खासकर उस समुद्री रास्ते पर जो रणनीतिक रूप से बहुत अहम है। ईरान यह भी चाहता है कि अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते से जुड़ी अपनी सैन्य गतिविधियां रोक दे। इसके बदले में तेहरान का कहना है कि वह जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को फिर से खोल देगा और बातचीत शुरू करेगा। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों की वजह से कच्चे तेल के एक्सपोर्ट और होर्मुज से होने वाले समुद्री ट्रैफिक पर असर पड़ा है। तेहरान ने बातचीत फिर से शुरू करने के लिए पहले सात शर्तें रखी थीं, जिनमें बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करना और ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति को बहाल करना शामिल था।

तेल की कीमतों में गिरावट

इसके अलावा, तेल की कीमतें $99 प्रति बैरल से नीचे आ गईं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ऐसी खबरें आईं कि ईरान जल्द ही उस समुद्री रास्ते को फिर से खोल सकता है, जिससे ग्लोबल क्रूड सप्लाई में रुकावट की चिंताएं कम हुईं। ब्रेंट क्रूड की कीमत सेशन के उच्चतम स्तर से 3.5% से ज़्यादा गिर गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में 2.25% की गिरावट आई। ईरान का यह प्रस्ताव कि वह उस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोल सकता है, इस शर्त पर है कि अमेरिका अपना मिलिट्री दबाव कम करे और ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां हटाने के लिए कदम उठाए। यह नई पहल ऐसे समय में हुई है जब जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते (मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग) के टूटने के बाद से मिलिट्री तनाव बना हुआ है। पश्चिम एशिया में युद्ध तब शुरू हुआ जब फरवरी के आखिर में अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर मिलकर हमले किए।

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