वैसे तो देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में चुनाव अगले बरस होने को है। लेकिन उससे पहले लखनऊ से दिल्ली तक बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश से सत्ता की हैट्रिक लगाने को बेकरार प्रदेश की योगी सरकार ने दिल्ली दरबार में अपनी चहलकदमियां भी तेज कर दी हैं। सूबे के मुखिया का दिल्ली दौरा राजनीतिक विश्लेषकों के ध्यान को आकर्षित कर रहा है। पहले तो सीएम योगी ने नोएडा में चाणक्य अमित शाह से मुलाकात की। उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के साथ शनिवार को भेंट वार्ता हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये बैठक दोपहर के वक्त करीब एक घंटे तक चली। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि इस मुलाकात में उत्तर प्रदेश से जुड़े विभिन्न अहम राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत हुई। जिनमें आने वाला विधानसभा और राज्यसभा चुनाव सबसे प्रमुख है। हालांकि बैठक का कोई आधिकारिक एजेंडा अभी तक सामने नहीं आया है। अब योगी आदित्यनाथ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीव के साथ बैठक करेंगे। ऐसे में क्या ये मिशन 2027 को लेकर मंथन का दौर है या फिर यूपी के 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव से पहले तैयारियों का खाका खींचा जा रहा है?

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इसे एक अहम लिटमस टेस्ट माना जा रहा है, और यही वजह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ताजा दिल्ली दौरा महज प्रशासनिक नहीं, बल्कि सीधे तौर पर भविष्य की राजनीतिक बिसात से जुड़ा देखा जा रहा है। संख्या बल के लिहाज से भाजपा गठबंधन के खाते में करीब 8 सीटें जाती दिख रही हैं, लेकिन असली खींचतान नामों के चयन को लेकर है। पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि मौजूदा सांसदों को दोबारा मौका दिया जाए या फिर 2027 के सियासी समीकरणों को धार देने के लिए नए चेहरों को संसद भेजा जाए।

सपा के ‘PDA’ की काट

समाजवादी पार्टी के पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए भाजपा ऐसे मजबूत नेताओं की तलाश में है जो जमीन पर अपने-अपने वर्गों में गहरी पैठ रखते हों। ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व के साथ-साथ सवर्ण (विशेषकर ब्राह्मण और क्षत्रिय) मतदाताओं की नाराजगी दूर करने और पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक का संतुलन साधना शीर्ष प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शीर्ष रणनीतिकारों के साथ बैठक में टिकट वितरण के इसी फार्मूले को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। पार्टी की रणनीति साफ है। राज्यसभा के जरिए संगठन और सरकार में उन कड़ियों को मजबूत किया जाए जो आगामी विधानसभा चुनाव में जीत का आधार बन सकें।

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