उत्तर प्रदेश में 10 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव 16 अक्टूबर को होने हैं। उम्मीद है कि BJP आठ सीटें जीतेगी, जबकि समाजवादी पार्टी को दो सीटें मिल सकती हैं। सत्ताधारी पार्टी अक्टूबर के पहले हफ़्ते में अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर सकती है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी का उत्तर प्रदेश से राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है। इन दोनों नेताओं को हाल ही में BJP के राष्ट्रीय संगठन में अहम पद मिले हैं। BJP के संभावित उम्मीदवार के तौर पर पीलीभीत के पूर्व सांसद वरुण गांधी के नाम पर भी चर्चा हो रही है।

ये चुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि मौजूदा नौ सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। वहीं, एक सीट पहले ही खाली हो गई थी; यह सीट BJP के दिनेश शर्मा के पास थी, जिन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उप-राज्यपाल नियुक्त होने के बाद इस्तीफ़ा दे दिया था। जिन नौ सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें बीजेपी नेता अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृज लाल, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी और हरदीप सिंह पुरी, साथ ही समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव और बीएसपी के रामजी गौतम शामिल हैं।

बीजेपी में अपने राष्ट्रीय महासचिवों को राज्यसभा भेजने की परंपरा रही है। इससे संगठन के वरिष्ठ नेताओं को संसद में अपनी बात रखने का मौका मिलता है, साथ ही देश भर में संगठनात्मक दौरों के दौरान उनका कद और प्रोटोकॉल भी बना रहता है। हाल ही में स्मृति ईरानी को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर शामिल किया गया था। इसी क्रम में, पार्टी उन्हें उत्तर प्रदेश कोटे से संसद भेजने की तैयारी कर रही है। इस बीच, हरीश द्विवेदी 2004 तक फुल-टाइम RSS ऑर्गनाइज़र के तौर पर काम करते रहे। इसके बाद वे BJP युवा मोर्चा के राज्य महासचिव और फिर राज्य अध्यक्ष बने। उन्होंने 2012 में बस्ती सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन तीसरे स्थान पर रहे। 2014 और 2019 में, वे लगातार दो बार बस्ती से सांसद चुने गए।

संगठनात्मक स्तर पर, द्विवेदी ने BJP के पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में राष्ट्रीय सचिव के तौर पर काम किया और असम व राजस्थान चुनावों में अहम भूमिका निभाई। हाल ही में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया और कर्नाटक व बिहार समेत कई अहम राज्यों की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। वहीं, वरुण गांधी की राजनीतिक वापसी अप्रत्याशित रूप से हो सकती है। उन्हें BJP ने दो साल से ज़्यादा समय पहले किनारे कर दिया था और 2024 के लोकसभा चुनावों में टिकट भी नहीं दिया था। राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा ज़ोरों पर है कि बीजेपी वरुण को राज्यसभा भेज सकती है। इससे पार्टी एक ऐसे जाने-माने चेहरे को वापस ला सकेगी जो कांग्रेस और खासकर गांधी परिवार का मुकाबला कर सके।

 

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